Masik Shivratri: कब है ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि 2026? यहां जानिए सटीक तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
Jyeshtha Masik Shivratri Puja Muhurat: ज्येष्ठ मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से सुख-शांति और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान शिव और माता पार्वती( सौ.AI)
Jyeshtha Masik Shivratri 2026: 15 मई को ज्येष्ठ महीने की मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। यह शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार ज्येष्ठ मास की मासिक शिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस व्रत महत्व और बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि, इस दिन भद्रा का प्रभाव भी रहेगा, लेकिन शिव पूजा में इसका कोई बाधक असर नहीं माना जाता। ऐसे में श्रद्धालु पूरे भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
किस दिन मनाई जाएगी मासिक शिवरात्रि ?
पंचाग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 15 मई को सुबह 08 बजकर 31 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगा।
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ऐसे में मासिक शिवरात्रि 15 मई को मनाई जाएगी। इस दिन आयुष्मान योग का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में किसी काम को करने से सफलता मिलती है और उसमें कोई बाधा नहीं आती है।
निशिता पूजा और शुभ मुहूर्त
धर्म शास्त्रों में मासिक शिवरात्रि पर निशिता पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार निशिता पूजा का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से देर रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
शुभ मुहूर्त
- इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 7 मिनट से 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।
- विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
मासिक शिवरात्रि पर कई शुभ संयोग
ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार मासिक शिवरात्रि पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं। सुबह से आयुष्मान योग रहेगा, जो दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक प्रभावी होगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में शिव पूजा और मंत्र जाप करने से विशेष पुण्य फल मिलता है।
भद्रा का समय और राहुकाल
15 मई को भद्रा सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं की माने तो शिव पूजा में भद्रा और राहुकाल को बाधक नहीं माना जाता। इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।
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मासिक शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। ज्येष्ठ मास की शिवरात्रि का व्रत बहुत फलदायी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। अविवाहित लोगों के लिए यह व्रत उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है।
