Easter Sunday(सौ.सोशल मीडिया)
Importance Of Easter Sunday: ईसाई समुदाय में गुड फ्राइडे और ईस्टर संडे का विशेष महत्व होता है। आज 3 अप्रैल को पूरे देशभर में गुड फ्राइडे मनाया गया। ईस्टर संडे, गुड फ्राइडे के ठीक दो दिन बाद यानी तीसरे दिन मनाया जाता है। इस वर्ष 5 अप्रैल को मनाया जा रहा है।
ईसाई ग्रंथों के अनुसार, शुक्रवार को सूली पर चढ़ाए जाने के बाद, प्रभु यीशु मसीह तीसरे दिन रविवार ईस्टर संडे को पुनर्जीवित हुए थे। इसलिए ईसाई समुदाय के लोग ईस्टर संडे के रूप में मनाते है।
प्राचीन ईसाई ग्रंथों में यह वर्णन मिलता है कि, ईसा मसीह लोगों को शांति, प्रेम और भाईचारे का उपदेश देते थे। उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण तत्कालीन यहूदी कट्टरपंथियों और शासकों को अपनी सत्ता डगमगाती हुई महसूस हो रही थी। इस वजह से उन्होंने प्रभु यीशु पर राजद्रोह के झूठे आरोप लगा दिए और उन्हें अमानवीय यातनाएं दी गईं।
अंततः उन्हें कांटों का ताज पहनाकर ‘कलवारी’ नाम के स्थान पर सूली पर लटका दिया गया। जिस दिन उन्होंने प्राण त्यागे, वह शुक्रवार का दिन था, जिसे ‘गुड फ्राइडे’ के रूप में जाना जाता है। वहीं शुक्रवार के बाद आने वाले रविवार पर दोबारा जीवित हो गए थे, जिसे ईस्टर संडे के रूप में मानाया जाता है।
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ईसाई समुदाय में गुड फ्राइडे की तरह ईस्टर संडे का महत्व है। गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन खुशी का नहीं, बल्कि शोक और आत्मचिंतन का होता है, क्योंकि इसी दिन ईसा मसीह ने मानवता की रक्षा के लिए सूली पर चढ़कर अपना बलिदान दिया था।
इसके तीन दिन बाद रविवार को ईस्टर संडे मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन प्रभु यीशु ने मृत्यु पर विजय प्राप्त कर पुनर्जीवन पाया था।
इस प्रकार यह दिन मानवता, क्षमा और विश्वास की जीत का प्रतीक है। जहां गुड फ्राइडे प्रभु यीशु के महान बलिदान को दर्शाता है, वहीं ईस्टर संडे उनके पुनर्जीवित होने की खुशी का पर्व है और अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश देता है।