कुछ दिन ये नियम अपना लो, जीवन बदल जाएगा, प्रेमानंद जी महाराज का शांति पाने का सरल मार्ग
Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि संत जब किसी को डांटते या प्रेम से समझाते हैं, तो उसका उद्देश्य कभी व्यक्तिगत नहीं होता। उनका एकमात्र लक्ष्य होता है आपका कल्याण और उद्धार।
- Written By: सिमरन सिंह
Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest)
Importance of Chanting God Name: प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि संत जब किसी को डांटते या प्रेम से समझाते हैं, तो उसका उद्देश्य कभी व्यक्तिगत नहीं होता। उनका एकमात्र लक्ष्य होता है आपका कल्याण और उद्धार। आज हमारा मन सांसारिक मोह में बिखरा हुआ है। संतों का प्रयत्न इसी बिखरे हुए मन को समेटकर श्रीजी के चरणों में समर्पित करना होता है।
माया के मोह से बाहर निकलना जरूरी
महाराज समझाते हैं कि हम सब माया के खिलौनों से खेल रहे हैं, जबकि काल इन सांसारिक रिश्तों को पहले ही काट चुका है। अगर इन्हीं मोहों को पकड़े-पकड़े शरीर छोड़ दिया, तो परिणाम दुखद होगा। लेकिन यदि यही प्रेम प्रिय-लाल को समर्पित कर दिया जाए, तो वही प्रेम भक्ति बन जाता है।
मां, पिता या जीवनसाथी से जो स्नेह है, वही प्रेम श्रीजी आपसे चाहते हैं। जब हर संबंध को ईश्वर से जोड़कर देखना सीख लेते हैं, तब दुनिया से बंधे बिना पूरी दुनिया से प्रेम संभव हो जाता है। यही सच्ची एकांतिक भक्ति है, जहां हृदय में ईष्ट और गुरु के अलावा कोई स्थान नहीं रहता।
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निवृत्ति मार्ग: आधे मन से नहीं चलता
निवृत्ति मार्ग यानी त्याग का रास्ता कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इस मार्ग पर चलने वाले को पूरी तरह भगवान पर निर्भर होना पड़ता है। महाराज श्री रघुनाथ दास गोस्वामी का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने अपार धन होने के बावजूद वैराग्य को कलंक मानकर माता-पिता के धन का त्याग किया और गायों द्वारा छोड़े गए चावल तक पर जीवन बिताया। इस मार्ग में तीन बातें जरूरी हैं
- तृण से भी छोटा बनो
- सांसारिक गपशप से दूर रहो
- ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखो
संकट ही शरणागति को परिपक्व करता है
कठिन समय से डरना नहीं चाहिए। सच्ची शरणागति तभी परिपक्व होती है जब संसार का कोई सहारा काम नहीं आता। द्रौपदी और गजेंद्र को भगवान उसी समय मिले। महाराज बताते हैं कि वे स्वयं भी सांसारिक सहारों को छोड़कर रातों-रात वृंदावन की शरण में आए। जब कोई नहीं बचता, तब दृष्टि भगवान पर टिकती है।
द्वेष का इलाज है नाम-जप
माया का खेल अजीब है। संतों को भी निंदा, ईर्ष्या और हिंसा का सामना करना पड़ता है। मीरा, प्रह्लाद जैसे भक्त इसके उदाहरण हैं। महाराज पूज्यपाद श्री उड़िया बाबा जी की कथा बताते हैं, जिन पर चाकू से हमला हुआ। उन्होंने बदले में हमलावर को दूध पिलाया और उसके प्रति द्वेष तक नहीं रखा। यही नाम-जप की शक्ति है, जो दृष्टि बदल देती है और सबसे बड़े पापी के लिए भी करुणा जगा देती है।
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अंतिम संदेश
श्रीधाम वृंदावन की शरण स्वीकार करो, स्वयं को सबसे छोटा मानो और हर जीव को प्रणाम करो। गुरु और श्रीजी पर अटूट विश्वास रखोगे, तो भीतर आध्यात्मिक प्रकाश प्रकट होगा और मन गहरी शांति से भर जाएगा। याद रखो, गिरने की ताकत हमारे पास हो सकती है, लेकिन उठने की शक्ति केवल गुरु और भगवान देते हैं।
