
जानवरों को खाना खिलाना (सौ.सोशल मीडिया)
Feeding Animals:सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में दया, सेवा और करुणा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है। यही कारण है कि पशु-पक्षियों और जानवरों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यकारी कर्म बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, यह न केवल अन्नदान का श्रेष्ठ रूप है, बल्कि इससे ग्रह दोषों की शांति, सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
प्रतिदिन सुबह पहली रोटी गाय को खिलाने से बृहस्पति और शुक्र ग्रह मजबूत होते हैं। इससे मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।
काले कुत्ते को रोटी या दूध-ब्रेड खिलाने से राहु, केतु और शनि के अशुभ प्रभाव खत्म होते हैं। यह काल भैरव का वाहन माना जाता है और इससे शत्रु भय व आकस्मिक संकट दूर होते हैं।
पितृपक्ष में या नियमित रूप से कौवों को भोजन कराने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष की शांति होती है।
तालाब या नदी में मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से आर्थिक संकट दूर होता है, भाग्य चमकता है और कर्ज से मुक्ति मिलती है।
मंगलवार को बंदरों को गुड़-चना या केला खिलाने से मंगल दोष कम होता है और कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
चींटियों को आटा या शक्कर खिलाने से धन लाभ और पारिवारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
जानवरों को भोजन खिलाने के नियम
पशु-पक्षियों को भोजन कराना पुण्य कर्म माना जाता है।
भोजन शुद्ध, ताज़ा और खाने योग्य होना चाहिए।
हर जानवर को उसकी प्रकृति के अनुसार भोजन दें।
सुबह और शाम का समय अधिक शुभ माना जाता है।
भोजन देते समय दया और करुणा का भाव रखें।
जानवरों को डराना या जबरदस्ती खिलाना गलत है।
ऐसी जगह भोजन दें जहाँ किसी को नुकसान या परेशानी न हो।
बासी, मसालेदार या हानिकारक भोजन न दें।
भोजन देने के बाद स्वच्छता का ध्यान रखें।
नियमित रूप से किया गया यह कार्य मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा देता है।
ज्योतिष शास्त्र में भी इसका विशेष महत्व बताया गया है। शनि दोष में कुत्ते या कौए को भोजन, सूर्य के लिए गाय को, बुध के लिए पक्षियों को और केतु के लिए चींटियों को भोजन देना लाभकारी माना गया है।
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इस प्रकार, सही नियमों और सच्चे भाव से जानवरों को भोजन कराना पुण्य की वृद्धि, ग्रह शांति और मानसिक संतोष का माध्यम बनता है। यह न केवल धर्म का पालन है, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है।






