द्विपुष्कर योग में आज मनाई जाएगी पापमोचनी एकादशी व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त से लेकर आध्यात्मिक महत्व
Ekadashi Shubh Muhurat:आज द्विपुष्कर योग में पापमोचनी एकादशी व्रत मनाया जा रहा है। जानिए इस व्रत की कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व, जिससे पापों से मुक्ति और जीवन में शुभता आती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माता लक्ष्मी (सौ.सोशल मीडिया)
Papamochani Ekadashi:आज 15 मार्च को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। यह एकादशी हिंदू धर्म के प्रमुख एकादशी में से एक है। जो हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि, इस दिन व्रत और विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
यही कारण है कि देशभर के मंदिरों और घरों में श्रद्धालु पूरे विधि-विधान के साथ यह व्रत रखते है। आज पापमोचनी एकादशी पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।
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पापमोचनी एकादशी का शुभ-मूहर्त
- पंचांग के अनुसार, आज एकादशी तिथि की शुरुआत – 14 मार्च, सुबह 08 बजकर 10 मिनट से
- एकादशी तिथि का समापन – 15 मार्च, सुबह 09 बजकर 16 मिनट तक
- उदयातिथि को मानते हुए पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च यानी आज किया जा रहा है।
- व्रत पारण का समय: 16 मार्च , सुबह 06 बजकर 30 मिनट से 08 बजकर 54 मिनट तक।
पापमोचनी एकादशी में बन रहें है कई शुभ योग
आज पापमोचनी एकादशी के दिन द्विपुष्कर योग और शुक्र के उच्च राशि में होने से मालव्य राजयोग बन रहा है। साथ ही मीन राशि में शुक्र, शनि और सूर्य के होने से शुक्रादित्य योग, त्रिग्रही योग योग का निर्माण हो रहा है, इन शुभ योग के आज होने से पापमोचनी एकादशी तिथि का महत्व और भी बढ़ गया है।
पापमोचनी एकादशी पूजन मुहूर्त
सुबह में 8 बजे से 9 बजकर 30 मिनट तक।
सुबह में 9 बजकर 30 मिनट से 11 बजे तक।
पापमोचनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
सनातन धर्म में पापमोचनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व बताया गया है जो इस प्रकार है-
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पापों का नाश और आत्म-शुद्धि
जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘पापमोचनी’ का अर्थ है पापों से मुक्ति दिलाने वाली। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से ब्रह्महत्या, स्वर्ण चोरी जैसे गंभीर पापों से भी मुक्ति मिल सकती है।
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मन की शांति और सकारात्मकता
उपवास और भगवान विष्णु की पूजा से मानसिक विकारों (क्रोध, मोह, लोभ) का नाश होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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आत्म-चिंतन और प्रायश्चित
यह एकादशी जीवन में की गई गलतियों के लिए पश्चाताप करने और फिर से सही रास्ते पर चलने का संदेश देती है।
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मोक्ष प्राप्ति
मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर अंत में बैकुंठ धाम प्राप्त करता है।
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हजारों गोदान का फल
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने से व्यक्ति को सहस्त्र यानी हजार गोदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
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आत्म-नियंत्रण
यह एकादशी साधक को इंद्रियों पर संयम रखना सिखाती है, जिससे आध्यात्मिक साधना में एकाग्रता बढ़ती है। यह एकादशी विक्रम संवत की अंतिम एकादशी होती है, जो नए वर्ष की शुरुआत से पहले पुराने कर्मों के प्रायश्चित के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
