Adhik Masik Durgashtami 2026: दुर्गा अष्टमी के दिन इस विधि से करें मां दुर्गा की पूजा, मिलेगा शुभ फल
Durga Mantra In Hindi: अधिक मास दुर्गाष्टमी मां दुर्गा की विशेष पूजा और साधना का दिन माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा करने से जीवन में सुख-शाति का वास होता है और सारे कष्ट दूर होते हैं।
- Written By: रीता राय सागर
दुर्गाष्टमी पूजा विधि (सौ. सोशल मीडिया)
Adhik Masik Durgashtami Kab Hai: पंचांग के अनुसार, हर माह के शुक्ल पक्ष में अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से और संपूर्ण विधि के साथ पूजा-अर्चना करने से मां प्रसन्न होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होकर घर में सुख-शांति का वास होता है।
मां दुर्गा सभी संकटों को दूर करती हैं और घर का अन्न-धन का भंडार भरा रहता है। अधिक मास में इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। इस साल अधिक मास की दुर्गा अष्टमी का व्रत 23 मई, शनिवार को है।
अधिक मास दुर्गा अष्टमी का समय
- शुरूआत- 23 मई को सुबह 5 बजकर 04 मिनट
- समापन- 25 मई को सुबह 4 बजकर 27 मिनट
दुर्गा अष्टमी में व्रत का महत्व
मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष लाभ मिलता है। इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और एक समय भोजन करते हैं या फिर फलाहार करते हैं। मां दुर्गा का व्रत रखने से मन एकाग्रचित होता है और देवी दुर्गा की भक्ति में मन लगता है। पूरे विधि विधान से व्रत पूरा करने पर लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली समस्याओं का नाश होता है। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।
सम्बंधित ख़बरें
पति-पत्नी को एक ही थाली में क्यों नहीं खाना चाहिए? जानिए भोजन के नियम और माता लक्ष्मी की कृपा का संबंध
Hanuman Mantra: हनुमान जी के इन चमत्कारिक मंत्रों का करें जाप, सारे कष्टों और भय से मिलेगी मुक्ति
Malmas 2026: शुरू हो चुका है ‘मलमास’ 2026, इन वस्तुओं के दान से मिलेगा महापुण्य, सुख-समृद्धि के बनेंगे योग
Gangajal Rakhne Ke Niyam: घर में किस जगह और कैसे रखें गंगाजल? जानिए कैसे गंगाजल से जुड़ा है भाग्योदय का योग
क्या है दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि
मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साफ व स्वच्छ वस्त्र धारण करें और इसके बाद गंगाजल से किसी विशेष स्थान को स्वच्छ कर माता दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए। मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करने के बाद देवी के सामने दीप प्रज्वलित करें। इसके बाद अक्षत, सिंदूर और लाल पुष्प चढ़ाकर मां की आराधना करें। मां को फल-मिठाई का भोग लगाएं और धूप, दीप व अगरबत्ती जलाकर हाथ जोड़कर प्रार्थना करें। इसके बाद दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
ये भी पढ़ें- Malmas 2026: शुरू हो चुका है ‘मलमास’ 2026, इन वस्तुओं के दान से मिलेगा महापुण्य, सुख-समृद्धि के बनेंगे योग
कैसे करें माता को प्रसन्न
- यदि आप मां दुर्गा को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो अष्टमी एक अच्छा दिन है। इस दिन मां दुर्गा को सुहाग की चीजें जैसे लाल चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी व आलता चढ़ाएं। इससे वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहेगी। पति-पत्नी के संबंध मजबूत होंगे और पति की आयु बढ़ेगी।
- इस विशेष दिन में आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इससे भी माता प्रसन्न होती है और आपके सभी बिगड़े काम भी बन जाते हैं।
किन मंत्रों का करें जाप (Maa Durga Ke Mantra)
- ॐ दुं दुर्गायै नमः
- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥
- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
- या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि॥
इन मंत्रों का जाप कर आप मां दुर्गा की भक्ति कर सकती हैं और अपने जीवन की सभी समस्याओं से निजात पा सकती हैं।
