करियर, धन और तरक्की में आ रही है रुकावट? चातुर्मास में मुख्य द्वार से जुड़ा यह उपाय बदल सकता है भाग्य
Chaturmas Vastu Tips For Main Door: चातुर्मास के दौरान यदि करियर, धन और तरक्की में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो वास्तु के अनुसार मुख्य द्वार से जुड़े कुछ सरल उपाय शुभ फल दे सकते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण (सौ.AI)
Chaturmas Main Door Remedy: सनातन धर्म में चातुर्मास को साधना, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष काल माना जाता है। वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से हो रही है। धार्मिक मान्यता है कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं।
यही कारण है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। वहीं वास्तु शास्त्र में चातुर्मास के दौरान घर के मुख्य द्वार से जुड़े कुछ उपायों को शुभ माना गया है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ पारंपरिक उपाय।
मुख्य द्वार पर लगाएं आम या अशोक के पत्तों का तोरण
वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं में मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मकता दूर रहती है। चातुर्मास के दौरान इस तोरण को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
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हर शाम मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यास्त के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति और सौहार्द का माहौल बना रहता है।
रोली या हल्दी से बनाएं स्वास्तिक चिन्ह
चातुर्मास के दौरान मुख्य द्वार पर रोली या हल्दी से स्वास्तिक बनाना भी शुभ माना जाता है। स्वास्तिक को मंगल, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक मान्यता है कि इससे घर में सौभाग्य का आगमन होता है और गुरु ग्रह की शुभता बढ़ने से शिक्षा, करियर और आर्थिक क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बनती है।
काले घोड़े की नाल लगाने की परंपरा
यदि आपको लगता है कि घर पर बार-बार नकारात्मक प्रभाव या बुरी नजर का असर होता है, तो कई लोग चातुर्मास के दौरान मुख्य द्वार पर ‘U’ आकार में काले घोड़े की नाल लगाने की परंपरा का पालन करते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, इससे नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश को रोकने में सहायता मिलती है। हालांकि, इस उपाय को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं भी प्रचलित हैं।
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चातुर्मास में मुख्य द्वार क्यों माना जाता है इतना महत्वपूर्ण?
वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को घर की ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ-सुथरा, रोशन और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। चातुर्मास जैसे पवित्र काल में यदि धार्मिक आस्था और सकारात्मक भाव के साथ इन पारंपरिक उपायों का पालन किया जाए, तो घर का वातावरण अधिक शांत और आध्यात्मिक महसूस हो सकता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक एवं वास्तु संबंधी पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इन उपायों के परिणामों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर ही अपनाएं।
