यह गुरुवार क्यों है ख़ास, कर लें ये 4 विशेष उपाय, सारे संकटों से मिलेगी मुक्ति!

Kaal Bhairav:11 दिसंबर, गुरुवार को कालाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन काल भैरव की उपासना की जाती है। इसके साथ ही कालाष्टमी के दिन इन उपायों को करने से जीवन की समस्त परेशानियां दूर हो जाती हैं।
यह गुरुवार क्यों है ख़ास, कर लें ये 4 विशेष उपाय, सारे संकटों से मिलेगी मुक्ति!
मासिक कालाष्टमी करें ये खास 4 उपाय (सौ.सोशल मीडिया)
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Kalashtami Upay: भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव को समर्पित मासिक कालाष्टमी 11 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जा रही है। यह व्रत जनसाधारण के साथ तंत्र-मत्र की साधना करने वाले लोगों के लिए भी खास मानी गई है। कहा जाता है कि, इस दिन काल भैरव देव की पूजा-अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती हैं।

साथ ही, इस दिन पर कुछ विशेष उपायों द्वारा आपको कई परेशानियों से छुटकारा भी मिल सकता है। ऐसे में चलिए जानते हैं इन विशेष उपायों के बारे में-

मासिक कालाष्टमी करें ये खास 4 उपाय:

उड़द दाल और काले तिल का भोग

हिन्दू लोक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी के दिन विधि विधान से काल भैरव देव की पूजा करें और उन्हें उड़द की दाल के पकौड़े, गुलगुले, जलेबी और काले तिल का भोग लगाएं। ऐसा करने से आपको काल भैरव देव का आशीर्वाद मिलता है और सभी दुख धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं।

इन चीजों का करें दान

कालाष्टमी के दिन आपको चावल, दूध, दही, नमक और गेहूं का दान करने से शुभ परिणाम मिल सकते हैं। वहीं आप शनि-राहु दोष से राहत पाने के लिए इस दिन पर उड़द दाल, काले तिल, काले चने और सरसों के तेल में छाया दान कर सकते हैं।

दूर रहेगी नेगेटिव एनर्जी

कालाष्टमी के दिन भैरव बाबा को मीठी रोटी भोग के रूप में जरूर अर्पित करें। इसके साथ ही भैरव बाबा के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और सुख-शांति बनी रहती है।

कालभैरव बाबा की पूजा का अध्यात्मिक महत्व

कालभैरव को संकट मोचक और स्थानों के रक्षक देवता भी माना जाता है। उनकी पूजा से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों का प्रभाव कम होता है। कालभैरव शत्रुओं से रक्षा करने वाले देवता माने जाते हैं, और उनकी पूजा से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद मिलती है। व्यापार और अन्य कार्यों में सफलता प्राप्त करने के लिए भी उनकी पूजा की जाती है। वे जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं।

आपको बता दें, मान्यताओं के अनुसार, भगवान कालभैरव को यह वरदान है कि भगवान शिव की पूजा से पहले उनकी पूजा होगी। विशेष रूप से उज्जैन जैसे स्थानों पर, महाकाल की पूजा का लाभ तभी मिलता है जब कालभैरव के दर्शन किए जाएं।

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