देवउठनी एकादशी के दिन गलती से भी न करें ये काम, वरना जीवन में परेशानियां आने में देर नहीं लगेगी
Lord Vishnu: देवउठनी एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी होती है। क्योंकि, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और फिर से सृष्टि का कार्यभार संभालते है। इस दौरान कुछ काम करने से बचना चाहिए।
- Written By: सीमा कुमारी
देवउठनी एकादशी के दिन क्या न करें (सौ.सोशल मीडिया)
Devuthani Ekadashi 2025 kab hai: हिंदू धर्म में देव उठनी एकादशी का बड़ा महत्व है। क्योंकि इस दिन से हिंदू धर्म के वैवाहिक और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। धार्मिक मान्याता है कि इस दिन सोए हुए देव जगते हैं इस लिए इसको देव उठनी एकदशी कहते है।
इस पर्व पर लोग पूजा, अर्चना बड़े विधि विधान के साथ करते हैं। लेकिन इस विशेष दिन को लेकर शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि इस दिन कुछ काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। आइए जान लेते है इस बारे में-
देवउठनी एकादशी के दिन भूल से भी न करें ये काम
न तोड़ें तुलसी के पत्ते
ज्योतिषयों के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी और शालिग्राम विवाह होता है । तुलसी माता भगवान विष्णु की प्रिय हैं और इस दिन वह स्वयं भी व्रत रखती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। कहते है भोग के लिए तुलसी के पत्तों को एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
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न करें अपशब्दों का प्रयोग
कहते है,इस दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा या वाद-विवाद करने से बचना चाहिए। साथ ही किसी के लिए अपशब्द या कटु वचन भी नहीं बोलने चाहिए। ऐसा करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है और जीवन में नकारात्मकता आ सकती हैं।
न करें तामसिक भोजन
देवउठनी एकादशी के दिन तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। आपको बता दें, एकादशी का दिन पूर्णतः सात्विक माना जाता है। इस दिन भूलकर भी मांस-मदिरा, प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
न करें चावल का सेवन
सनातन धर्म में एकादशी के दिन चावल खाने की सख्त मनाही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चावल खाने से व्यक्ति अगले जन्म में कीड़े की योनि में जन्म लेता है। इसलिए व्रत रखने वाले और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
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न सोएं दिन में
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दिन दिन में सोना वर्जित होता है। जो लोग व्रत नहीं भी कर रहे हैं, उन्हें भी इस दिन दिन में नहीं सोना चाहिए। इस शुभ दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने बैठकर भजन-कीर्तन और जागरण करना शुभ माना जाता है।
