शनिदेव को काला तिल चढ़ाते हुए करें इन विशेष मंत्रों का जाप, कष्टों से मिलेगी मुक्ति

शनिदेव को प्रसन्न करने और उनके अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए काले तिल से जुड़ा उपाय करना बहुत ही प्रभावी उपाय माना जाता हैं। जिससे शनि देव खुश होते हैं और भक्तों की पीड़ा दूर करते हैं।
शनिदेव को काला तिल चढ़ाते हुए करें इन विशेष मंत्रों का जाप, कष्टों से मिलेगी मुक्ति
शनिदेव (सौ.सोशल मीडिया)
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शनिवार का दिन सूर्य पुत्र और न्याय के देवता भगवान शनिदेव को समर्पित हैं। हिन्दू धर्म ग्रथों के अनुसार, शनि देव हर व्यक्ति के कर्मों का हिसाब रखते हैं और उसके हिसाब से ही सबको फल भी देते हैं। शनि देव विलक्षण शक्तियों वाले देवता हैं। शनिदेव सूर्य पुत्र हैं, लेकिन सूर्यदेव से इनकी ज्यादा पटनी नहीं खाती। शनिदेव की अशुभ स्थिति में व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं।

ज्योतिष बताते है कि, जब शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, या कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हों, तो जातक को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। ऐसे में शनिदेव को प्रसन्न करने और उनके अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए काले तिल से जुड़ा उपाय करना बहुत ही प्रभावी उपाय माना जाता हैं। जिससे शनि देव खुश होते हैं और भक्तों की पीड़ा दूर करते हैं।

शनिदेव को काले तिल चढ़ाते समय ऐसे करें पूजा

  • काले तिल हमेशा शनिवार को ही शनिदेव को अर्पित करने चाहिए।
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • शनिदेव को सरसों का तेल और काले तिल लोहे के पात्र में रखकर ही चढ़ाएं।
  • शनिदेव पर तेल या तिल चढ़ाते समय अपनी नजरें सदैव शनिदेव के चरणों पर ही रखें।
  • शनिदेव से आंखें नहीं मिलानी चाहिए।
  • पूजा करते समय और मंत्र जाप करते समय मन में किसी भी तरह का संशय या नकारात्मक विचार न लाएं।
  • काले तिल के साथ सरसों का तेल, काले या नीले फूल, नीले वस्त्र, उड़द दाल, खिचड़ी आदि भी अर्पित कर सकते हैं। शनिदेव के सामने सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं।
  • यदि संभव हो तो शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक
  • नीम करोली बाबा को कंबल अर्पित करते हुए उनसे क्या करें निवेदन, मनोकामनाएं होंगी पूरी

  • जलाएं और “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करते हुए सात बार परिक्रमा करें।
  • शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
  • आप इसे किसी निर्धन व्यक्ति को दान कर सकते हैं या शनि मंदिर में चढ़ा सकते हैं।
  • मंत्र जाप के बाद शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करना भी बहुत लाभकारी होता है।

इन मंत्रों का करें जाप

शनिदेव का मूल मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः यह मंत्र शनिदेव को समर्पित है और इसका जाप करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।

शनि गायत्री मंत्र

ॐ काकध्वजाय विद्महे, खड्गहस्ताय धीमहि, तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥: हम कौवे के ध्वज वाले, हाथ में खड्ग धारण किए हुए, धीरे-धीरे चलने वाले (शनिदेव) का ध्यान करते हैं. वे मंद गति वाले शनि महाराज हमें अपनी शरण प्रदान करें। शनिवार के दिन इन मंत्रों का जाप और विधि-विधान से पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। यह साढ़ेसाती और ढैय्या के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है, कुंडली में शनि को मजबूत करता है, और जीवन के हर कष्ट व बाधा को दूर कर सुख-शांति प्रदान करता है।

शनिदेव का बीज मंत्र

ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥:

मैं उन शनिदेव को नमन करता हूं, जिनका रंग नीला है, जो सूर्यपुत्र और यम के बड़े भाई हैं, और जो छाया (शनिदेव की माता) तथा मार्तण्ड (सूर्यदेव का दूसरा नाम) से उत्पन्न हुए हैं।

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