चैत्र नवरात्रि ‘सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र’ पाठ की महिमा तो जानिए, नोट कीजिए स्तोत्र
Chaitra Navratri Durga Stotra Path Rules: चैत्र नवरात्रि के दौरान दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इस समय सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करने से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है।
- Written By: सीमा कुमारी
आदि शक्ति मां दुर्गा (सौ.सोशल मीडिया)
Chaitra Navratri Saptashloki Durga Stotra: हिंदू नव वर्ष शुरू होते हैं आदि शक्ति मां दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि शुरू हो जाती हैं। इस वर्ष 19 मार्च से शुरू हो रही हैं। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और विधि-विधान से घटस्थापना कर मां दुर्गा की पूजा आरंभ करते हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां के अलग-अलग नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भक्त व्रत रखकर, दुर्गा सप्तशती का पाठ करके तथा भक्ति-भाव से माता की आराधना करते हैं।
सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ की महिमा
धार्मिक मान्यता है कि, इन पवित्र दिनों में यदि कोई भक्त सच्चे मन से रोजाना सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करता हैं, तो इससे मात रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही साधक को शुभ परिणाम भी मिलने लगते हैं।
सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम्
॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥
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शिव उवाच
देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।
कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥
देव्युवाच
शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् ।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥
विनियोग
ॐ अस्य श्री दुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः, श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ।
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हिसा ।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥1॥
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।
दारिद्र्यदुःखभयहारिणि त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥2॥
सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ॥3॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते ॥4॥
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते ॥5॥
रोगानशोषानपहंसि तुष्टा रूष्टा
तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥6॥
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि ।
एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम् ॥7॥
॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्णम् ॥
मां दुर्गा के मंत्र
1. मंत्र: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
2. मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महागौर्ये नम:
3. सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां दुर्गा का ध्यान
ॐ जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम|
लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम॥
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सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्र का पाठ करते समय किन बातों का रखें ध्यान
पाठ से पहले स्नान करें और दीपक/धूप जलाएं और माता दुर्गा का ध्यान करें।
पाठ के दौरान मन को शांत रखें और किसी तरह के नकारात्मक विचार मन में न लाएं।
नौ दिनों में प्रतिदिन एक ही समय और एक ही स्थान पर बैठकर पाठ करना उत्तम माना जाता है।
