Maa Dhumavati : मां धूमावती का रहस्यमयी स्वरूप, क्यों नहीं करतीं सुहागिन महिलाएं उनकी पूजा
Maa Dhumavati Ki Mahima:दशमहाविद्याओं में से एक मां धूमावती का स्वरूप अत्यंत रहस्यमयी और अनूठा माना जाता है। जानिए आखिर क्यों महिलाएं नहीं करती है धूमावती देवी की पूजा।
- Written By: सीमा कुमारी
माता धूमावती (सौ.जैमिनी)
Maa Dhumavati Mahavidya: धूमावती जयंती हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाई जाती है। दृक पंचांग के अनुसार, इस साल धूमावती जयंती ज्येष्ठ मास में 22 जून को मनाई जाने वाली है। धर्म शास्त्रों में मां धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवीं देवी माना गया है।
जिनकी पूजा गुप्त नवरात्रि के दौरान की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता धूमावती की उपासना से दुख, शारीरिक कष्ट और हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाया करती है।
कौन हैं माता धूमावती?
धर्म शास्त्रों के अनुसार, माता धूमावती 10 महाविद्या की 7वीं शक्ति मानी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार शिव-पार्वती कैलाश पर भ्रमण कर रहे थे, तभी अचानक देवी पार्वती को भूख लगी। शिवजी ने पार्वती को कुछ समय प्रतीक्षा के लिए कहा।
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लेकिन देवी पार्वती की भूख बढ़ने लगी और इतनी बढ़ गई कि उन्होंने शिव को ही निगल लिया। शिव जी के भीतर विष का प्रभाव है,जिसका असर देवी पार्वती पर भी होने लगा, जिससे पार्वती का शरीर धूएं के समान काला हो गया। कहा जाता है कि देवी पार्वती के इसी विकृत स्वरूप से देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई।
कैसे करें देवी धूमावती की पूजा?
देवी धूमावती की पूजा अन्य देवी-देवता से थोड़ा अलग होता हैं। माता धूमावती की पूजा हमेशा पश्चिम दिशा में मुख करके करनी चाहिए। पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र आपको धारण करने चाहिए।
पूजा से पहले पूजा स्थल पर माता धूमावती की तस्वीर आपको रखनी चाहिए। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर माता की आराधना शुरू करनी चाहिए। पूजा के दौरान देवी धूमावती के मंत्र ‘ॐ धूम धूम धूमावती देव्यै स्वाहा’का जप करना चाहिए।
इसके साथ ही आप धूमावती कवच का पाठ भी कर सकते हैं। माना जाता है कि देवी की आराधना करने से आपके जीवन से दुख और दरिद्रता का अंत हो जाता है।
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आखिर क्यों महिलाएं नहीं करती है धूमावती देवी की पूजा?
धर्म शास्त्रों में माता धूमावती यूं तो माता पार्वती का ही स्वरूप हैं, लेकिन वैधव्य यानि विधवा का स्वरूप होने के कारण इनकी पूजा सुहागिन महिलाओं के द्वारा नहीं की जाती।
इनके स्वरूप भी बहुत उग्र है। शास्त्रों के अनुसार माता धूमावती की ध्वनि इतनी तीव्र है कि, जिससे सुनकर मनुष्य भयभीत हो उठते हैं। हमेशा भूखी रहने वाली माता धूमावती दुष्ट और दैत्यों का संघार करके उनका ही भक्षण कर जाती हैं, यह कारण भी है कि देवी पार्वती के इस स्वरूप की पूजा सुहागिन महिलाओं के द्वारा नहीं की जाती।
हालांकि जो लोग पूरी श्रद्धा से माता धूमावती की आराधना करते हैं, उनके सभी कष्टों को माता दूर करती हैं, तंत्र साधना करने वाले लोग देवी धूमावती में अटूट आस्था रखते हैं।
