- Hindi News »
- Religion »
- Bhujaria Festival Is Celebrated In Bundelkhand On The Second Day Of Raksha Bandhan
क्या होता है भुजरिया पर्व, जानिए रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाने की क्या होती है इसकी परंपरा
Bhujriya Festival 2025: रक्षाबंधन की परंपराओं में दूसरे दिन भुजरिया पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुंदेलखंड के सभी लोकपर्व में से एक होता है। हरियाली से जुड़े इस पर्व को कजलियां के नाम से भी जानते है।
- Written By: दीपिका पाल

जानिए भुजरिया पर्व का महत्व (सौ.सोशल मीडिया)
Bhujriya Festival 2025: आने वाले दिन 9 अगस्त को भाई-बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन मनाया जाएगा। यह दिन सबसे खास दिन में से एक होता है जिसकी कई परंपरा निभाई जाती है। रक्षाबंधन की परंपराओं में दूसरे दिन भुजरिया पर्व मनाया जाता है। यह पर्व बुंदेलखंड के सभी लोकपर्व में से एक होता है। हरियाली और खुशहाली से जुड़े इस पर्व को कजलियां के नाम से भी जाना जाता है। बुंदेलखंड में महिलाओं के बीच इस परंपरा का खासा महत्व होता है।
पुराने समय से इस परंपरा को क्षेत्र में निभाया जा रहा है। धूमधाम के साथ भुजरियां लेकर नदियों में पूजा करने के साथ विसर्जित करते है। इस पर्व का जुड़ाव बहनों या लड़कियों से होता है जो मायके में आकर इस परंपरा को निभाती है।
सम्बंधित ख़बरें
इस वैलेंटाइन डे 3 गुना बढ़ी कंडोम की डिमांड, 2025 का रिकॉर्ड टूटा, दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ ये शहर निकला आगे
Diabetes: क्या फल खाने से बिगड़ रहा है शुगर लेवल? जानें कितने GI वाले फल हैं खतरनाक
सावधान! नशे से भी बुरी है जंक फूड की क्रेविंग! बस इन 5 चीजों से बदलें अपना स्नैक
Ramadan Fasting Rules: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना टूट सकता है आपका रोजा!
जानिए क्या होता है भुजरिया
भुजरियां पर्व में भुजरिया का महत्व होता है यह गेहूं के पौधें होते है जिसे जल में प्रवाहित करते है। सावन के महीने की अष्टमी और नवमीं को छोटी – छोटी बांस की टोकरियों में मिट्टी की तह बिछाकर गेहूं या जौं के दाने बोए जाते हैं। इसके बाद इन्हें रोजाना पानी दिया जाता है। सावन के महीने में इन भुजरियों को झूला देने का रिवाज भी है। इस भुजरिया को उगने में एक सप्ताह लग जाता है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन भुजरियां पर्व बनाकर इसे जल स्त्रोतों में प्रवाहित कर देते है। भुजरियां पर्व के दिन गेहूं के हरे इन पौधों यानि भुजरिया की प्रवाहित करने से पहले पूजा की जाती है इसके चारों घूमकर लोकगीत गाए जाते है।
इस दौरान कामना की जाती है, कि इस साल बारिश बेहतर हो जिससे अच्छी फसल मिल सकें। श्रावण मास की पूर्णिमा तक ये भुजरिया चार से छह इंच की हो जाती हैं। महिलाएं इन टोकरियों को सिर पर रखकर जल स्त्रोतों में विसर्जन के लिए ले जाती हैं। जल से प्रवाहित करने के दौरान कुछ भुजरिया को साथ लाकर एक-दूसरे को देकर शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद देते हैं। यह पर्व नई फसल का प्रतीक माना जाता है।
ये भी पढ़ें– बिहार: मां सीता का बनेगा भव्य मंदिर, 882 करोड़ की आएगी लागत, अमित शाह आज रखने जा रहे आधारशिला
यह है भुजरिया की कथा
इस पर्व से जुड़ी कहानी प्राचीन है जिसके अंतर्गत आल्हा की बहन चंदा श्रावण माह से ससुराल से मायके आई तो सारे नगरवासियों ने कजलियों से उनका स्वागत किया था। महोबा के सिंह सपूतों आल्हा-ऊदल-मलखान की वीरता आज भी उनके वीर रस से परिपूर्ण गाथाएं बुंदेलखंड की धरती पर बड़े चाव से सुनी व समझी जाती है। बताया जाता है कि महोबे के राजा के राजा परमाल, उनकी बिटिया राजकुमारी चन्द्रावलि का अपहरण करने के लिए दिल्ली के राजा पृथ्वीराज ने महोबे पै चढ़ाई कर दी थी। राजकुमारी उस समय तालाब में कजली सिराने अपनी सखी – सहेलियन के साथ गई थी। राजकुमारी को पृथ्वीराज हाथ न लगाने पाए इसके लिए राज्य के बीर-बांकुर (महोबा) के सिंह सपूतों आल्हा-ऊदल-मलखान की वीरतापूर्ण पराक्रम दिखलाया था। इन दो वीरों के साथ में चन्द्रावलि का ममेरा भाई अभई भी उरई से जा पहुंचे। कीरत सागर ताल के पास में होने वाली ये लड़ाई में अभई वीरगति को प्यारा हुआ, राजा परमाल को एक बेटा रंजीत शहीद हुआ। बाद में आल्हा, ऊदल, लाखन, ताल्हन, सैयद राजा परमाल का लड़का ब्रह्मा, जैसे वीरों ने पृथ्वीराज की सेना को वहां से हरा के भगा दिया। महोबे की जीत के बाद से राजकुमारी चन्द्रवलि और सभी लोगों अपनी-अपनी कजिलयन को खोंटने लगी। इस घटना के बाद सें महोबे के साथ पूरे बुन्देलखण्ड में कजलियां का त्यौहार विजयोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा है।
इस पर्व कजलियों (भुजरियां) पर गाजे-बाजे और पारंपरिक गीत गाते हुए महिलाएं नर्मदा तट या सरोवरों में कजलियां सिराने के लिए जाती हैं। हरियाली की खुशियां मनाने के साथ लोग एक – दूसरे से मिलेंगे और बड़े बुजुर्ग कजलियां देकर धन – धान्य से पूरित क हने का आशीर्वाद देंगे।
Bhujaria festival is celebrated in bundelkhand on the second day of raksha bandhan
Get Latest Hindi News , Maharashtra News , Entertainment News , Election News , Business News , Tech , Auto , Career and Religion News only on Navbharatlive.com
लेटेस्ट न्यूज़
जे जे अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की भूख हड़ताल, 200 डॉक्टर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर
Feb 17, 2026 | 08:35 AM12वीं बोर्ड घोटाला: छत्रपति संभाजीनगर में सीसीटीवी ने खोली पोल, 18 शिक्षक-कर्मचारी निलंबित
Feb 17, 2026 | 08:32 AMकरण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन पहुंची बॉम्बे हाई कोर्ट, पंजाबी फिल्म अनुबंध विवाद पर याचिका
Feb 17, 2026 | 08:20 AMइस वैलेंटाइन डे 3 गुना बढ़ी कंडोम की डिमांड, 2025 का रिकॉर्ड टूटा, दिल्ली-मुंबई को पीछे छोड़ ये शहर निकला आगे
Feb 17, 2026 | 08:15 AMकिराना दुकानों की आड़ में ड्रग्स कारोबार, पिंपरी-चिंचवड़ में 64 वर्षीय महिला भी पकड़ी गई
Feb 17, 2026 | 08:11 AMहाॅकी मैच के दौरान गोलीबारी से दहला अमेरिका, 3 लोगों की दर्दनाक मौत, सामने आया खौफनाक VIDEO
Feb 17, 2026 | 08:04 AM25 मौतों पर सख्त टिप्पणी, हाई कोर्ट बोला-रेगुलेटरी चूक और अधिकारों का उल्लंघन
Feb 17, 2026 | 08:00 AMवीडियो गैलरी

इंसानियत शर्मसार! UGC विवाद में छात्राओं को रेप और मर्डर की धमकी, थाने में भी सुरक्षित नहीं बेटियां- VIDEO
Feb 16, 2026 | 10:05 PM
प्रशासन की लापरवाही ने ली मासूम की जान, नागपुर में खुले नाले में गिरा 3 साल का बच्चा; 24 घंटे बाद मिली लाश
Feb 16, 2026 | 09:59 PM
UP विधानसभा में गूंजी युवाओं की आवाज, सपा विधायक ने खोली भर्तियों की पोल; आरक्षण में धांधली का लगाया आरोप
Feb 16, 2026 | 09:51 PM
बिहार विधानसभा में ‘बेचारा’ शब्द पर घमासान! राजद विधायक के बयान ने रामविलास पासवान के अपमान पर छेड़ी नई जंग
Feb 16, 2026 | 09:45 PM
हेल्थ इंश्योरेंस या धोखा? मां के इलाज के लिए दर-दर भटका बेटा, प्रीमियम के बाद भी कंपनी का क्लेम देने से इंकार
Feb 16, 2026 | 09:41 PM
ATM जाने के बहाने निकलीं और बन गईं हिंदू परिवार की बहू! छतरपुर में दो चचेरी बहनों के अंतरधार्मिक विवाह पर बवाल
Feb 16, 2026 | 09:19 PM













