भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद ये काम करना न भूलें, तभी मिलेंगे शुभ फल
Lord Surya:सूर्य देव को जल का अर्घ्य देने के बाद भी अगर आपको शुभ फल प्राप्त नहीं हो रहे हैं, तो इसका कारण आपकी द्वारा की जा रही कुछ गलतियां हो सकती हैं। जानिए क्या है सही तरीका
- Written By: सीमा कुमारी
सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जरूर करें ये काम (सौ.सोशल मीडिया)
Jal Chadane Ke Niyam: सनातन धर्म में सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि सूर्य देव न सिर्फ हमारे जीवन को रोशनी देते हैं, बल्कि हमें आत्मविश्वास, ऊर्जा और सेहत का वरदान भी देते हैं। कई लोग रोजाना अर्घ्य देते हैं, लेकिन ज्यादातर को यह नहीं पता होता कि जल अर्पित करने के बाद क्या करना चाहिए।
आम तौर पर लोग अर्घ्य देकर सीधे अपने कामों में लग जाते हैं, जबकि शास्त्रों में अर्घ्य देने के बाद एक बेहद खास क्रिया बताई गई है जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है, और घर में सुख-समृद्धि का मार्ग खोलती है।
वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हर सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सिर्फ एक काम कर ले, तो सूर्य देव की कृपा लगातार उस पर बनी रहती है। आइए जानते हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से आखिर वह काम क्या है और क्यों जरूरी माना गया है।
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सूर्य को अर्घ्य देने के बाद जरूर करें ये काम:
शास्त्रों के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देने के बाद तुरंत पीछे मुड़ना या सीधे घर के अंदर जाना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है। कुछ क्षण सूर्य की दिशा में खड़े होकर प्रणाम करें, आशीर्वाद प्राप्त करें।
ऐसा करने से पूरे दिन में सफलता, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
अर्घ्य देने के बाद क्या करें
शास्त्रों में बताया गया है कि, जब उगते सूर्य को जल अर्पित करते हैं, तो वह जल धरती पर गिरता है और उसकी प्रत्येक बूंद सूर्य की किरणों के संपर्क में आकर ऊर्जा का स्वरूप धारण कर लेती है।
शास्त्रों के अनुसार अर्घ्य के बाद उस जल को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। सबसे पहले उस जल को हल्के से अपने हाथों से स्पर्श करें और थोड़ी मात्रा में अपने माथे, छाती या बाहों पर लगाएं। ऐसा करने से सूर्य की ऊर्जा आपके शरीर में समा जाती है और दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है।
क्यों जरूरी है यह छोटा-सा कदम
सूर्य देव शक्ति, ऊर्जा और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। जब आप अर्घ्य देते हैं, तो उस ऊर्जा से सीधा जुड़ाव होता है। यदि अर्घ्य देने के बाद तुरंत वहां से चले जाएं, तो उस क्षण की ऊर्जा अधूरी रह जाती है।
जब आप उस पवित्र जल को अपने शरीर पर लगाते हैं, तो यह सूर्य की ऊर्जा को आत्मसात करने जैसा कार्य होता है। ऐसा करने से शरीर में तेज बढ़ता है, चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
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यह प्रक्रिया कमजोर सूर्य की स्थिति को भी संतुलित करती है। जिन लोगों के जीवन में आत्मविश्वास की कमी या अवसाद का भाव रहता है, उन्हें नियमित रूप से यह विधि अपनानी चाहिए। इससे धीरे-धीरे मानसिक और आत्मिक ऊर्जा में सुधार होता है।
