रंगभरी एकादशी (सौ.सोशल मीडिया)
Rangbhari Ekadashi Kab Hai: वैसे तो, एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन हिंदू धर्म में यह एक मात्र ऐसी एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी विशेष पूजा की जाती है। वो है रंगभरी एकादशी है। रंगभरी एकादशी हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी का व्रत 27 फरवरी को रखा जाएगा।
शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को काशी लेकर आए थे और उनके साथ रंग खेलकर इस पर्व की शुरुआत की थी।
इस एकादशी को शिव और विष्णु भक्त विशेष रूप से मनाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा। पचांग को देखते हुए 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। साथ ही व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 06:47 से 09:06 बजे के बीच किया जाएगा।
रंगभरी एकादशी का सीधा संबंध शिव और पार्वती से है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव माता पार्वती को विवाह के पश्चात काशी लाए थे। काशीवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया और रंग-गुलाल उड़ाकर उत्सव मनाया। इसलिए इस एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की उपासना भी विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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