
सुखबीर सिंह बादल पर हमला (सौजन्य-एक्स)
पंजाब: अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में तख्त द्वारा दी गई सजा काट रहे धार्मिक शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला हुआ है। सुखबीर सिंह बादल पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में गोलियां चलाई गई हैं।
इस जानलेवा हमले में सुखबीर सिंह बादल बाल-बाल बच गए। हमलावर को आते देख आस-पास के लोगों ने तुरंत एक्शन में आते हुए हमलावर को धर-दबोचा, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। स्वर्ण मंदिर में पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल सहित शिरोमणि अकाली दल के नेता श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा घोषित धार्मिक दंड के तहत 2 दिसंबर से ‘सेवा’ कर रहे थे।
बादल समेत एसएडी नेताओं पर गोली चलाने वाले शूटर की पहचान पुलिस ने नारायण सिंह चौरा के रूप में की है, जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने काबू कर लिया और पकड़ लिया। एडीसीपी हरपाल सिंह ने कहा, “यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। सुखबीर जी को उचित सुरक्षा दी गई थी। नारायण सिंह चौरा (हमलावर) कल भी यहां था। आज भी उसने सबसे पहले गुरु को नमन किया।”
#WATCH एडीसीपी हरपाल सिंह ने कहा, "यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं…सुखबीर जी को ठीक से कवर किया गया…नारायण सिंह चौरा (हमलावर) कल भी यहां आए थे और आज भी उन्होंने सबसे पहले गुरु को प्रणाम किया फिर ये गोली चली दी … किसी को चोट नहीं आई है…'' https://t.co/6ViyPIUolO pic.twitter.com/49qiEBRz0E — ANI_HindiNews (@AHindinews) December 4, 2024
जब उनसे पूछा गया कि क्या गोली लगने से किसी को चोट लगी है, तो उन्होंने कहा, “नहीं।” सिंह ने कहा, “सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। उस व्यक्ति (शूटर) ने कुछ शरारत करने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका।” पुलिस अधिकारी ने जवाब दिया कि बादल को कोई चोट नहीं आई है।
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को तख्त ने धार्मिक सजा दी है। इसके बाद वे व्हीलचेयर पर गले में तख्ती लटकाए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुंचे थे। इस सजा के तहत बादल को स्वर्ण मंदिर में ‘सेवादार’ के तौर पर काम करना था और दरवाजे पर ड्यूटी करने के साथ-साथ लंगर परोसना था।
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अकाल तख्त ने सुखबीर सिंह बादल को ये सजा शिरोमणि अकाली दल और पंजाब में उनकी सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई ‘गलतियों’ का हवाला देते हुए दी है। हालांकि, सुखबीर सिंह बादल के पैर में चोट लगी है और इस वजह से वे 3 दिसंबर से 2 दिन के लिए श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) के घंटाघर के बाहर ड्यूटी कर रहे थे।






