तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन (सौजन्य सोशल मीडिया)
Trinamool Congress Leader Derek O’Brien: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने वाले बिल को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने मोदी सरकरा पर हमला बोला है। डेरेक ओब्रायन का कहना है कि, बिल पर विचार के लिए जो गठित संयुक्त संसदीय समिति बनाई गई है, उसपर विश्वास नहीं कर सकते हैं।
डेरेक ओ ब्रायन ने शुक्रवार को कहा कि, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को 30 दिन तक जेल में रहने पर पद से हटाने से संबंधित विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब कई विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि वे समिति में शामिल नहीं होंगे।
ओ ब्रायन ने जेपीसी के समक्ष विपक्ष की आपत्तियों के उदाहरण सूचीबद्ध किए, जिनमें आमतौर पर सत्ता पक्ष के सदस्यों का दबदबा होता है। उन्होंने “जेपीसी पर विश्वास न कर पाने के छह कारण” शीर्षक से लिखे एक ब्लॉग में पुराने मामलों का जिक्र किया, जिनमें विपक्ष ने जेपीसी के समक्ष आपत्तियां जताई थीं। बोफोर्स अनुबंध घोटाले की जांच के लिए 1987 में गठित जेपीसी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि छह प्रमुख विपक्षी दलों ने समिति का बहिष्कार किया था, क्योंकि इसके अधिकतर सदस्य कांग्रेस से थे।
डेरेक ओ ब्रायन ने आगे कहा कि, ‘‘दलों में से दो अब भी भाजपा के सहयोगी हैं। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) और असम गण परिषद (अगप)। 1988 में प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट को विपक्ष (गैर-कांग्रेसी) ने पक्षपातपूर्ण होने के कारण खारिज कर दिया था।” तृणमूल नेता ने 2013 में ऑगस्टा वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले की जांच के लिए गठित जेपीसी का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि जब राज्यसभा में इसके गठन का प्रस्ताव पारित हुआ था, तब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा था कि यह सरकार की ‘‘व्यर्थ की कवायद” और ‘‘ध्यान भटकाने की रणनीति” होगी।
ओ ब्रायन ने कहा कि 2014 से अब तक संसद ने 11 संयुक्त संसदीय समितियों का गठन किया है। उन्होंने कहा कि सात मामलों में जेपीसी के गठन का प्रस्ताव सत्र के आखिरी दिन पारित किया गया। तृणमूल नेता ने कहा, ‘‘इसके विपरीत, 2004 से 2014 के बीच तीन जेपीसी का गठन किया गया, और कोई भी अंतिम दिन गठित नहीं की गई।” उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक पर जेपीसी की हालिया रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसे विपक्ष की असहमतियों के अनुसार संशोधित करने के बाद संसद में पेश किया गया था।
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ओ ब्रायन ने कहा कि इस मामले में भी विपक्ष की आपत्तियों को नजर अंदाज कर दिया गया। तृणमूल नेता ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 1987 में बोफोर्स पर जेपीसी का गठन किया था और 1989 के अगले चुनाव में वह सरकार बनाने में विफल रही। उन्होंने कहा कि इसी तरह, 1992 में कांग्रेस ने हर्षद मेहता घोटाले पर जेपीसी का गठन किया था और 1996 के लोकसभा चुनाव में सरकार नहीं बना पाई। ओब्रायन ने कहा कि भाजपा ने 2002 और 2003 में केतन पारेख घोटाले पर और कांग्रेस ने 2011 और 2013 में 2जी घोटाले तथा वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले पर जेपीसी गठित कीं, लेकिन ये दल इसके बाद हुए लोकसभा चुनावों में हार गए। तृणमूल नेता ने सवाल किया, ‘‘यह संयोग है या संकेत?”