बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bangladesh Iron Lady Former Prime Minister Sheikh Hasina: बांग्लादेश की राजनीति में पिछले दो दशक से शेख हसीना का नाम चर्चा में रहा है, जो कभी देश की “आयरन लेडी” और विकास की प्रतीक थीं। उनके समर्थक उन्हें आधुनिक बांग्लादेश का निर्माता मानते हैं, जबकि आलोचक उन्हें सड़कों पर उठने वाली आवाजों को दबाने वाली तानाशाह कहते थे। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि जिस न्यायाधिकरण का गठन उन्होंने युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने के लिए किया था, वही एक दिन उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए कठघरे में ला खड़ा करेगा। 77 वर्षीय हसीना के राजनीतिक जीवन में आया यह मोड़ दुनिया के किसी देश पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला शासनाध्यक्ष की कहानी का एक दुखद अंत है।
शेख हसीना का जन्म 1947 में एक राजनीतिक परिवार में हुआ था। उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक और पहले राष्ट्रपति थे। ढाका विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद हसीना छात्र राजनीति में एक्टिव हुईं। उनके जीवन में सबसे बड़ा दुख 1975 के सैन्य तख्तापलट के बाद आया, जब उनके माता-पिता और तीन भाइयों सहित परिवार के कई सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी गई।
उस समय विदेश में होने के कारण वह और उनकी बहन रेहाना बच गईं। भारत में शरण लेने के छह साल बाद, मई 1981 में वह बांग्लादेश लौटीं, जहां उन्हें उनकी गैर-मौजूदगी में ‘अवामी लीग’ का महासचिव चुन लिया गया था। इसके बाद बांग्लादेश की राजनीति में उनकी प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया के साथ शुरू हुई वैचारिक लड़ाई, जिसे ‘बेगमों की लड़ाई’ कहा जाता है ने तीन दशक से अधिक समय तक देश की दिशा तय की।
शेख हसीना पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बनीं। हालाकि 2001 में वह सत्ता से बाहर हो गईं, लेकिन 2008 में उन्होंने प्रचंड बहुमत से वापसी की और फिर उनके शासन का एक लंबा दौर शुरू हुआ। लगातार चुनाव जीतकर वह दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाली महिला शासनाध्यक्षों में से एक बन गईं।
उनके कार्यकाल में बांग्लादेश ने जबरदस्त आर्थिक विकास देखा। पद्मा ब्रिज जैसे बड़े बुनियादी ढांचे तैयार हुए, गरीबी कम हुई और देश एक वैश्विक परिधान महाशक्ति बन गया। उनके समर्थकों के लिए यह सब हसीना की दूरदर्शिता का परिणाम था।
इन उपलब्धियों के बावजूद, हसीना पर हमेशा विरोधी आवाजों को दबाने, मीडिया को नियंत्रित करने और विपक्षी नेताओं को जेल भेजने के आरोप लगते रहे। उनकी सत्ता का पतन 2024 में तब शुरू हुआ जब सरकारी नौकरियों में आरक्षण की घोषणा को लेकर छात्रों के नेतृत्व में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ। सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कड़ी कार्रवाई के बाद हिंसा भड़क उठी, जिसने उन्हें प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने और भारत भागने के लिए मजबूर कर दिया।
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इसके बाद बनी अंतरिम सरकार ने उस अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) का पुनर्गठन किया, जिसने 2024 के प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई के लिए हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराधों का मुकदमा चलाया। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रदर्शनों में लगभग 1,400 लोग मारे गए थे। सोमवार को ICT ने कई महीनों की सुनवाई के बाद हसीना को मौत की सजा सुनाई। फिलहाल भारत में रह रहीं हसीना अब सीमा पार से उस देश को देख रही हैं जिस पर उन्होंने इतने लंबे समय तक शासन किया और जिसके विकास में उनका इतना बड़ा योगदान था।