क्या है इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल? शेख हसीना को सुनाई सजा-ए-मौत, कितने देशों में है मान्यता

Bangladesh News: बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई; देशभर में हाई अलर्ट घोषित हुआ।
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शेख हसीना को मौत की सजा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Sheikh Hasina ICT Case: बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा दी है। यह फैसला ट्रिब्यूनल के तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को सुनाया। इस मामले में हसीना के दो करीबी सहयोगी पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन को भी दोषी ठहराया गया।

ट्रिब्यूनल के अनुसार, जुलाई से अगस्त 2024 के बीच हुए छात्र आंदोलन के दौरान, हसीना और उनके साथियों ने निर्दोष प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने के आदेश दिए थे। इस दौरान सेना और पुलिस ने हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों का इस्तेमाल किया। अदालत ने पाया कि सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे 1,400 से अधिक लोगों की मौत हुई और 14,000 से अधिक घायल हुए।

ट्रिब्यूनल ने हसीना दोषी करार दिया

अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि शेख हसीना ने छात्रों को राजाकार कहकर सार्वजनिक रूप से उनका अपमान किया था और सभी को फांसी दो जैसे आदेश दिए। कोर्ट में पेश की गई ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को फोरेंसिक जांच से प्रमाणिक माना गया। इन सबूतों के आधार पर ट्रिब्यूनल ने हसीना और उनके सहयोगियों को दोषी पाया।

फैसले के बाद बांग्लादेश सरकार ने पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया है। राजधानी ढाका सहित कई शहरों में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए “देखते ही गोली मारो” के सख्त आदेश भी जारी किए गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, शेख हसीना फिलहाल भारत में निर्वासन में हैं और अदालत के सामने पेश नहीं हुईं। अंतरिम सरकार ने उनकी संपत्ति जब्त करने की सिफारिश की है, ताकि उसे हिंसा के पीड़ित परिवारों के बीच बांटा जा सके।

क्या है इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल? (What is the International Crimes Tribunal?)

इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना 2010 में बांग्लादेश सरकार ने की थी। दिलचस्प बात ये है कि इस सरकार का नेतृत्व खुद शेख हसीना कर रही थी। इसका उद्देश्य युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों की सुनवाई करना है, खासकर 1971 के मुक्ति संग्राम से जुड़े मामलों में।

यह अदालत बांग्लादेशी कानून के तहत काम करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मान्यता नहीं है। इसके फैसले केवल बांग्लादेश में लागू होते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठन और संयुक्त राष्ट्र इसके मामलों पर करीबी नजर रखते हैं। हालांकि इसमें सुनाए गए फैसले केवल बांग्लादेश में लागू होते हैं, जिसे किसी और देश को मानने पर मजबूर नहीं किया जा सकता है।

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