सिर्फ एक दिन की घटनाओं का रिकॉर्ड नहीं है। यह उन चेहरों की कहानी भी है, जो अपनी उम्मीदों के साथ घर से निकले थे। उन पुलिसकर्मियों की भी, जो अपनी ड्यूटी निभा रहे थे; और उस लोकतांत्रिक व्यवस्था की भी, जिसमें अलग-अलग आवाज़ें साथ मौजूद रहती हैं। इन तस्वीरों को देखकर हर व्यक्ति अलग तरह से सोच सकता है। लेकिन शायद सबसे जरूरी बात यही है कि किसी भी लोकतंत्र की ताकत संवाद, संवेदनशीलता और एक-दूसरे को सुनने की क्षमता में होती है। जब समाज सवाल पूछता है और संस्थाएं जवाब देती हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है। शायद यही वजह है कि कुछ तस्वीरें खबर से आगे बढ़कर इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं।