सरेंडर करो, 1.10 करोड़ रुपए पाओ… सरकार का बंपर ऑफर, नक्सलियों को और भी मिलेंगे इनाम
Odisha Government Scheme for Naxalites : ओडिशा में नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने के लिए बड़ी घोषणा की गई है। सरकार ने कहा है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 1.10 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
- Written By: रंजन कुमार
नक्सलियों का आत्मसमर्पण। इमेज-प्रतीकात्मक, एआई
Naxalites Surrender Scheme : ओडिशा सरकार ने राज्य से माओवाद का नामोनिशान मिटाने के लिए लुभावनी सरेंडर नीति का एलान किया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने खजाने का दरवाजा खोलते हुए नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण की इनामी राशि में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने वालों का न केवल स्वागत होगा, बल्कि उनके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित भी बनाया जाएगा।
नई नीति के तहत नक्सलियों के पदानुक्रम के अनुसार वित्तीय सहायता तय की गई है। माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य जैसे कोई बड़ा नेता आत्मसमर्पण करता है तो उसे सरकार से 1.10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि दी जाएगी। स्टेट कमेटी मेंबर के लिए यह राशि 55 लाख रुपये और मिलिट्री कमांडर स्तर के कैडरों के लिए 27.50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। सरकार का मानना है कि पैसों और बेहतर पुनर्वास का यह विकल्प उग्रवादियों को जंगलों की कठिन जिंदगी छोड़ने के लिए मजबूर करेगा।
हथियारों के लिए अलग से बोनस
सिर्फ आत्मसमर्पण ही नहीं, बल्कि खतरनाक हथियारों को सौंपने पर भी अलग से इनाम दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर एक AK-47 राइफल जमा करने पर 3.30 लाख रुपये और लाइट मशीन गन सौंपने पर 5 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा सरेंडर करने वाले नक्सलियों को मकान बनाने के लिए जमीन, पढ़ाई के लिए वित्तीय मदद और स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
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पिछले छह महीनों का असरदार रिपोर्ट कार्ड
ओडिशा में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और इस आकर्षक नीति का असर जमीन पर दिखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले छह महीनों में 45 से अधिक सक्रिय नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। नवंबर 2025 से अब तक हुए इन आत्मसमर्पणों के बदले सरकार 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है। सबसे सुखद परिणाम मलकानगिरी, रायगड़ा और कंधमाल जैसे इलाकों में देखने को मिल रहे हैं, जो कभी माओवाद के गढ़ माने जाते थे, लेकिन अब वहां नक्सली गतिविधियां न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं। पुलिस महानिदेशक (DGP) कार्यालय के अनुसार यह नीति न केवल नक्सलियों की कमर तोड़ रही, बल्कि उनके सूचना तंत्र को भी ध्वस्त कर रही है। अब बंदूक की जगह विकास और विश्वास की राजनीति ओडिशा के जंगलों में अपनी जगह बना रही।
