सीएम हिमंत बिस्वा सरमा। इमेज-सोशल मीडिया
Assam SIR News : असम में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासत का पारा चढ़ गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई फाइनल वोटर लिस्ट ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। स्पेशल इन डेप्थ रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार मतदाता सूची से कुल 2.43 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या कुल मतदाता आबादी का लगभग 0.97 प्रतिशत है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा के मुताबिक असम के 35 में से 24 जिलों में मतदाताओं की संख्या में गिरावट आई है। यह कमी कुछ सौ से लेकर 30 हजार नामों तक दर्ज की गई है। रिपोर्ट में एक दिलचस्प रुझान सामने आया है, जहां मुस्लिम बहुल जिलों में मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है। आदिवासी बहुल इलाकों- तीन पहाड़ी जिलों और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन के 5 जिलों में वोटरों की संख्या में भारी कमी आई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों का एकमात्र लक्ष्य एक त्रुटिहीन वोटर लिस्ट तैयार करना था।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस प्रक्रिया को और अधिक स्पष्ट करते हुए इसे संदिग्ध मतदाताओं के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करार दिया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि लाखों संदिग्ध नामों को लिस्ट से बाहर कर दिया गया है और यह प्रक्रिया अभी थमी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की पात्रता पर संदेह है, उन्हें भविष्य में भी हटाया जाता रहेगा। सीएम ने यह आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने धमकियों और दबाव के बावजूद संदिग्ध मतदाताओं के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
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हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र जालुकबाड़ी में भी नामों की बड़ी कटौती हुई है। आंकड़ों के अनुसार जालुकबाड़ी में ड्राफ्ट लिस्ट के मुकाबले 4,310 नाम (करीब 2.05%) हटाए गए हैं। फाइनल लिस्ट में यहां 2,06,314 वोटर बचे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। प्रशासन का कहना है कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जो अन्य राज्यों में भी अपनाई जाती है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले हुए इस बदलाव ने राज्य में पक्ष-विपक्ष के बीच जुबानी जंग को और तेज कर दिया है।