बंगाल सरकार की सुस्ती पर SC का हंटर, 8,500 अधिकारियों की तैनाती का अल्टीमेटम; जानिए क्या है पूरा मामला
Supreme Court: 4 फरवरी को हुई सुनवाई में सीएम ममता कोर्ट में खुद पेश हुई थीं और उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। दूसरे राज्य से माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्ति का भी उन्होंने विरोध किया था।
- Written By: मनोज आर्या
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Supreme Court On West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी, 2026) को मतदाता सूची के स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि वह बी रैंक के जो 8,505 अधिकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध करवाना चाहती है, उनकी लिस्ट चुनाव आयोग को दे दे।
4 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोर्ट में खुद पेश हुई थीं और उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। इस दौरान ममता ने दूसरे राज्य से माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने का भी विरोध किया था। तब चुनाव आयोग ने कहा था कि राज्य सरकार ने अधिकारी नहीं दिए इसलिए, बाहर से अधिकारी बुलाने पड़ रहे हैं।
कोर्ट ने बंगाल सरकार को दिया था निर्देश
चुनाव आयोग के इस जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को बी रैंक के अधिकारी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया था। सोमवार को सुनवाई में बंगाल सरकार के वकील श्याम दीवान ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच को बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार माइक्रो ऑब्जर्वर के काम के लिए चुनाव आयोग को 8,505 अधिकारी उपलब्ध करवाने के लिए तैयार है।
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सीजेआई सूर्यकांत ने इस मामले पर क्या कहा?
सीजेआई ने इस पर कहा कि यह अच्छा होगा। वहां के अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों को बेहतर समझ सकते हैं। आप जल्द अधिकारियों की लिस्ट चुनाव आयोग को दीजिए। हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा कि अभी तक न तो अधिकारियों की लिस्ट मिली है और न ही अधिकारी उपलब्ध करवाए गए। इस पर सीजेआई ने बंगाल सरकार को फटकार लगाई और कहा कि 4 फरवरी को पिछली सुनवाई हुई थी। आप 5 फरवरी को लिस्ट दे देते तो आयोग अब तक इस पर फैसला ले लेता।
सुनवाई के दौरान राज्य की तरफ से अधिकारियों की लिस्ट चुनाव आयोग को दे दी गई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि वह चाहते हैं कि पक्षों की तरफ से जताई आशंका का समाधान हो, जिसके लिए उन्होंने कुछ खास निर्देश दिए-
- राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि यह सभी 8505 अधिकारी अपने-अपने डिस्ट्रिक्ट इलेक्टर ऑफिसर (ERO) को रिपोर्ट करें।
- चुनाव आयोग अपने हिसाब से उन्हें काम दे।
- चुनाव आयोग उनके बायो डेटा और कार्य अनुभव को देख कर उन्हें माइक्रो ऑब्जर्वर बनाने के बारे में फैसला ले।
- इन लोगों को संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया जाए।
- इनकी नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय ERO लेंगे।
- ERO को मतदाताओं के कागजात की जांच के लिए और एक हफ्ता देने की जरूरत है।
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