भारत ने चीन-बांग्लादेश को दिया करारा जवाब… चिकन नेक का सीक्रेट प्लान तैयार, देखते रह जाएंगे पड़ोसी देश
Chicken Neck Corridor News : भारत सरकार सिलिगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) में 40 किमी लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बना रहा है। यह परियोजना पूर्वोत्तर को सुरक्षित और निर्बाध जोड़ने के लिए है।
- Written By: रंजन कुमार
बांग्लादेश, चीन सीमा पर भारत के सुरक्षा इंतजाम। इमेज-एआई
India China Border Strategy : भारत के नक्शे पर वह पतली-सी पट्टी, जो देश को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है, अब अभेद्य बनने जा रही। रणनीतिक रूप से संवेदनशील चिकन नेक (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) को लेकर भारत सरकार ने ऐसा सीक्रेट प्लान बनाया है, जो दुश्मनों के होश उड़ा देगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि इस कॉरिडोर की सुरक्षा और कनेक्टिविटी को पुख्ता करने के लिए अब जमीन के नीचे रेलवे ट्रैक बिछाए जाएंगे।
सरकार की योजना के अनुसार पश्चिम बंगाल के टिन माइल हाट से रंगापानी तक 40 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक जमीन के नीचे (अंडरग्राउंड) बनाया जाएगा। इसकी गहराई 20 से 24 मीटर होगी। साथ ही मौजूदा रेलवे लाइनों को चार लेन का किया जाएगा। टिन माइल हाट और रंगापानी का चयन किया गया है, क्योंकि यह इलाका बांग्लादेश सीमा के बेहद करीब है। युद्ध की स्थिति में सबसे पहले निशाने पर आ सकता है।
क्यों है चिकन नेक पर इतना खतरा?
मात्र 22 किलोमीटर चौड़ी यह जमीन की पट्टी भारत की जीवन रेखा है। इसके उत्तर में चीन की चुंबी वैली है, जहां चीनी सेना हमेशा घात लगाए बैठी रहती है। वहीं, दक्षिण में बांग्लादेश की सीमा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कभी युद्ध की स्थिति बनी तो दुश्मन सबसे पहले इसी रास्ते को काटकर पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने की कोशिश करेगा। हाल के दिनों में बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरता और चीन द्वारा सीमा पर बनाए जा रहे इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस खतरे को और बढ़ा दिया है।
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भारत का मास्टरस्ट्रोक
जमीन के नीचे रेलवे लाइन बनाने के कई बड़े फायदे हैं। हवाई हमलों या ड्रोन अटैक का इस अंडरग्राउंड ट्रैक पर कोई असर नहीं होगा। साथ ही युद्ध के समय सैनिकों, हथियारों और ईंधन की सप्लाई बिना रुके जारी रहेगी। इसके अलावा सैटेलाइट या जासूसी विमानों के लिए जमीन के नीचे की हलचल को ट्रैक करना कठिन होता है।
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चीन और बांग्लादेश को सीधा संदेश
एक दशक में चीन ने डोकलाम के करीब सड़कों का जाल बिछाया है। वहीं, बांग्लादेश के लालमोनिरहाट एयरबेस का विकास भी चिंता का विषय है। भारत का यह कदम साफ संदेश है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक और आधुनिक सोच के साथ काम कर रहा है। यह प्रोजेक्ट न केवल भारत की इंजीनियरिंग ताकत को दिखाता है, बल्कि विरोधियों को यह चेतावनी भी है कि चिकन नेक को छूना अब नामुमकिन होगा।
