मार्को रूबियो की वैश्विक खनिज रणनीति: क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षा के लिए 55 देशों का बड़ा गठबंधन
Critical Mineral Strategy: अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने चीन पर खनिज निर्भरता कम करने के लिए 55 देशों के साथ मिलकर 'फोर्ज' पहल शुरू की है। इसमें यूक्रेन और रूस की सैन्य टीमों की बैठक का भी जिक्र है।
- Written By: प्रिया सिंह
मेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (सोर्स-सोशल मीडिया)
International mineral security strategy initiative: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए एक नई वैश्विक रणनीति पेश की है। उन्होंने चेतावनी दी कि खनिजों के लिए केवल एक देश पर निर्भर रहना राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा जोखिम है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य संसाधनों के स्रोतों में विविधता लाना और चीन जैसे देशों के बढ़ते हुए प्रभुत्व को पूरी तरह से नियंत्रित करना है। भारत समेत दुनिया के 55 देशों ने इस ऐतिहासिक ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ सम्मेलन में सक्रिय रूप से भाग लेकर अपना समर्थन दिया है।
एक देश का प्रभुत्व और जोखिम
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में खनिज आपूर्ति श्रृंखला खतरनाक रूप से एक ही देश के हाथों में केंद्रित हो गई है। यह स्थिति न केवल आर्थिक विकास को बाधित करती है बल्कि इसे भविष्य में किसी भू-राजनीतिक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि महामारी या राजनीतिक अस्थिरता जैसी कोई भी वैश्विक बाधा आपूर्ति को किसी भी समय पूरी तरह से ठप कर सकती है।
विकसित देशों के नीति निर्माताओं ने कच्चे माल और बुनियादी खनिजों को सुरक्षित करने के महत्व को पिछले कई वर्षों से लगातार नजरअंदाज किया है। रूबियो के अनुसार हम केवल उत्पादों के डिजाइन के प्यार में पड़ गए लेकिन यह भूल गए कि निर्माण के लिए बुनियादी सामग्री सबसे जरूरी है। अगर विनिर्माण के लिए जरूरी खनिजों की उपलब्धता सुरक्षित नहीं होगी तो भविष्य में कोई भी तकनीकी नवाचार करना संभव नहीं हो पाएगा।
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फोर्ज पहल और निवेश
अमेरिकी सरकार ने खनिज आपूर्ति के लिए ऐतिहासिक ‘फोर्ज’ (FORGE) पहल का शुभारंभ किया है जिसमें भारत और मोरक्को जैसे कई अंतरराष्ट्रीय साझेदार शामिल हैं। इस महत्वपूर्ण रणनीतिक कोशिश के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका ने पहले ही अपने कोष से अरबों डॉलर की राशि देने का बड़ा वादा किया है। डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन और एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक जैसी अमेरिकी एजेंसियां अब इन जरूरी मिनरल्स में निवेश के लिए जरूरी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएंगी।
बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा होने के कारण वर्तमान समय में निजी क्षेत्र इन खनिजों के खनन और प्रसंस्करण में निवेश करने से काफी हिचकिचाता है। विदेशी प्रतिस्पर्धी अक्सर सरकारी सब्सिडी के माध्यम से कीमतों में भारी कटौती करते हैं जिससे अन्य देशों की स्थानीय खनन परियोजनाएं आर्थिक रूप से अव्यवहारिक हो जाती हैं। रूबियो ने आगाह किया कि एक बार बाजार पर कब्जा होने के बाद वे देश अपनी मर्जी के मुताबिक कोई भी कीमत वसूल सकते हैं।
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रूस-यूक्रेन और ईरान पर रुख
इस सम्मेलन के दौरान रूबियो ने जानकारी दी कि यूक्रेन और रूस की तकनीकी सैन्य टीमें पहली बार अमेरिका से जुड़े एक फोरम में मिल रही हैं। हालांकि उन्होंने जल्दबाजी में किसी नतीजे पर न पहुंचने की सलाह दी लेकिन कहा कि दोनों पक्षों के बीच अनसुलझे मुद्दों की सूची छोटी हो गई है। युद्ध समाप्त होने के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण और उसकी आर्थिक रिकवरी के लिए उसके अपने खनिज संसाधन अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं।
ईरान के मुद्दे पर रूबियो ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सार्थक और गंभीर बातचीत के लिए हमेशा अपने दरवाजे खुले रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी बैठक को रियायत नहीं माना जाना चाहिए और इसमें मिसाइलों तथा परमाणु कार्यक्रम जैसे गंभीर विषयों पर बात होनी चाहिए। अर्जेंटीना और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर अमेरिका वैश्विक स्तर पर खनिजों की कमी को दूर करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
