अप्रैल में चीन दौरे पर जाएंगे डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Donald Trump Xi Jinping Talk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को बताया कि उनकी फोन पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक “बेहद उत्कृष्ट, लंबी और व्यापक” बातचीत हुई, जिसमें व्यापार, सुरक्षा, वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। ट्रंप ने इसे अमेरिका-चीन संबंधों के लिए आने वाले तीन सालों में सकारात्मक संकेत करार दिया।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, “मैंने अभी राष्ट्रपति शी के साथ एक शानदार बातचीत पूरी की है। यह बातचीत लंबी और गहन रही, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषय शामिल थे।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वो अप्रैल में चीन के दौरे पर जाएंगे।
ट्रंप के अनुसार, बातचीत में चीन द्वारा अमेरिका से ऊर्जा और कृषि उत्पादों की खरीद पर विशेष जोर रहा। इसमें चीन द्वारा अमेरिका से तेल और गैस की खरीद के साथ-साथ कृषि उत्पादों की अतिरिक्त खरीद पर भी चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि चीन मौजूदा सीजन में सोयाबीन की खरीद बढ़ाकर 20 मिलियन टन करने पर विचार कर रहा है, जबकि अगले सीजन के लिए 25 मिलियन टन खरीदने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
बातचीत के दौरान विमानन और विनिर्माण से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। ट्रंप ने कहा कि “विमान इंजनों की डिलीवरी” सहित कई अन्य मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति शी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों नेता इस रिश्ते को बनाए रखने के महत्व को समझते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि अपने कार्यकाल के अगले तीन वर्षों में चीन के साथ कई सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।
बातचीत में ताइवान, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान की मौजूदा स्थिति जैसे संवेदनशील वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ट्रंप ने अपनी प्रस्तावित अप्रैल चीन यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि वे इस दौरे को लेकर उत्साहित हैं।
हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस बातचीत पर कोई अलग आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, लेकिन ट्रंप के वक्तव्य से संकेत मिलता है कि अमेरिका और चीन रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर शीर्ष स्तर पर संवाद बनाए हुए हैं।
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गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के रिश्ते लंबे समय से सहयोग और प्रतिस्पर्धा के मिश्रण से गुजरते रहे हैं। व्यापार, तकनीक, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सैन्य रणनीति और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद भी रहे हैं और संवाद भी। ताइवान इस संबंध में सबसे संवेदनशील विषय बना हुआ है, जिसका बातचीत में शामिल होना इसके महत्व को दर्शाता है।