हमले में घायल जवान, फोटो- सोशल मीडिया
तिनसुकिया जिले के जगुन इलाके में जब लोग गहरी नींद में थे, तभी अचानक हुए धमाकों ने पूरी फिजा में बारूद की महक घोल दी। यह हमला केवल एक पुलिस कैंप पर ही नहीं था, बल्कि राज्य की उस सुरक्षा व्यवस्था पर भी एक कड़ा प्रहार था जिसे आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पुख्ता बताया जा रहा था।
घटना देर रात करीब दो बजे की है, जब अंधेरे का फायदा उठाकर उग्रवादियों ने पुलिस कमांडो कैंप को निशाना बनाया। कैंप में मौजूद एक अधिकारी के अनुसार, लगभग दो बजकर एक मिनट पर पहला भीषण धमाका सुना गया, जिसने सबकी नींद उड़ा दी। इसके बाद अगले 20 मिनट तक लगातार धमाकों और गोलीबारी का सिलसिला चलता रहा, जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह हमला इतना अचानक और तीव्र था कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला और सन्नाटे में केवल बारूद की गूंज सुनाई दे रही थी।
हमलावरों ने लेखापानी पुलिस थाना की जगुन चौकी के अंतर्गत आने वाले 10 मील क्षेत्र के शिविर पर कम से कम पांच आरपीजी (रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड) गोले दागे। इनमें से चार गोले शिविर के अंदर फटे, जिससे वहां तैनात चार जवान घायल हो गए। इन धमाकों के बाद उग्रवादियों ने कैंप पर ग्रेनेड भी फेंके और इसके बाद अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
घायल कमांडो का फिलहाल कैंप के भीतर ही प्राथमिक उपचार किया जा रहा है और सुरक्षा अधिकारी उनकी चोटों की गंभीरता पर नजर बनाए हुए हैं। यह स्थान सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है क्योंकि यह असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बिल्कुल पास स्थित है।
इस हमले के पीछे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन ‘यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट’ (ULFA-I) का हाथ होने का गहरा संदेह जताया जा रहा है। जिस समय और तरीके से यह वारदात अंजाम दी गई, उसे देखकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह विधानसभा चुनावों से पहले माहौल बिगाड़ने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।
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आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में भी तिनसुकिया के ककोपाठार में एक सैन्य कैंप पर इसी तरह हमला हुआ था, जिसमें तीन जवान घायल हुए थे और उसकी जिम्मेदारी भी इसी संगठन ने ली थी। घटना के तुरंत बाद तिनसुकिया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मयंक कुमार झा के नेतृत्व में भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। ऊपरी असम और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है ताकि किसी अन्य अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां जंगल और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि इन हमलावरों को कानून के दायरे में लाया जा सके।