असम चुनाव 2026: हाई प्रोफाईल सीट पर 'हाई वोल्टेज सीएम', हिमंत बिस्वा सरमा क्यों लड़ते हैं जालुकबारी से चुनाव?

Assam Assembly Election: असम में कई सीटें ऐसी हैं जो सत्ता की दिशा तय करती हैं। इन्हीं सीट में से एक है जालुकबारी जहां से सीएम सरमा खुद मैदान में हैं। अब भाजपा के लिए क्यों है यह सीट खास, जानेंगे इसे।
Assam Assembly Election 2026
सीएम सरमा (सोर्स- आईएएनएस)
Published on
Updated on

CM Sarma Jalukbari Seat: असम की जालुकबारी सीट जो भाजपा का गढ़ मानी जाती है। अपने पूरे विधानसभा करियर में हिमंत बिस्वा सरमा ने यहीं से चुनाव लड़ा है।उन्होंने 2001 में पहली बार इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। फिर 2006 और 2011 में लगातार जीत दर्ज कर हैट्रिक बनाई। 2016 में भाजपा में शामिल होकर फिर इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की और साल 2021 में उन्होंने पांचवीं बार 1 लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल कर। यह साबित कर दिया कि उन्हें जालुकबारी सीट से हराना नामुमकिन है।

इस बार भी हिमंत बिस्वा सरमा यहीं से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि हिमंत बिस्वा सरमा का इस सीट से चुनाव लड़ना भी इस सीट की अहमियत को बढ़ा देता है। जिस वजह से इसे 'वीआईपी सीट' और 'पावर सेंटर सीट' भी कहा जाता है।

क्यों है यह सीट खास?

जालुकबारी गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट शहरी और अर्ध शहरी वोट बैंक का मिक्सचर है। बताया जाता है कि जालुकबारी सीट का वोट बैंक भी काफी स्टेबल है। साथ ही यह सीट राज्य के शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्रो के पास है इसलिए यहां के वोटर भी काफी ज्यादा जागरूक हैं। साथ ही यह हिमंत बिस्वा सरमा के लिए एक अभेद किले की तरह है जहां से वह कभी भी चुनाव नहीं हारते।

यहीं से क्यों लड़ते हैं चुनाव?

सीएम सरमा लगातार इसी सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। इसकी वजह साफ है और वो यह कि उनकी पकड़ इस क्षेत्र में मजबूत है। किए गए विकास कार्य और हर वर्ग हिंदू, मुस्लिम, असमिया व बंगाली में उनकी अच्छी स्वीकार्यता है। इसी वजह से ही वह असम विधानसभा चुनाव 2026 में छठी बार जीत हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने वाले हैं।

धार्मिक समीकरणों से भी है खास?

अगर धार्मिक समीकरणों के हिसाब से देखें तो इस सीट पर हिंदू मतदाता करीब 65 से 75 परसेंट है। वहीं मुस्लिम वोटर 20 से 30 परसेंट हैं। साथ ही सिख और ईसाई धर्म के मतदाताओं की भी इस सीट पर अहम भूमिका है। गौरतलब है कि इस सीट पर धर्म के आधार पर वोटिंग का असर उतना ज्यादा नहीं दिखता, जितना ग्रामीण या सीमावर्ती क्षेत्रों में देखने को मिलता है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com