अशोक कुमार के हीरो बनते ही टूट गई थी शादी, फिर ऐसा चमका किस्मत, 187 हफ्तों तक थिएटर में चली 1 फिल्म
बॉलीवुड एक्टर अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर, 1911 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। अशोक कुमार का आज बर्थ एनिवर्सरी है। बहुत काम लोग को पता है कि अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। अशोक कुमार अपने घर में सभी भाई-बहनों में बड़े थे।
- Written By: सोनाली झा
अशोक कुमार (फोटो क्रेडिट-सोशल मीडिया)
मुंबई: बॉलीवुड एक्टर अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर, 1911 को बिहार के भागलपुर में हुआ था। अशोक कुमार का आज बर्थ एनिवर्सरी है। बहुत काम लोग को पता है कि अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर अशोक कुमार रख लिया था। अशोक कुमार अपने घर में सभी भाई-बहनों में बड़े थे।
अशोक कुमार जब पहली बार फिल्म इंडस्ट्री में आए तब उनकी महीने की तनख्वाह 75 रुपये थी। अशोक कुमार ने एक बार कहा था कि उन दिनों कॉल गर्ल हीरोइनें बनती थीं और दलाल हीरो। दरअसल, अशोक कुमार कभी भी एक्टर नहीं बनना चाहते थे। उनको तो अपने पापा की तरह एक वकील बनना था। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
अशोक कुमार साउंड इजीनियर का करते थे काम
अशोक कुमार बॉम्बे टॉकीज में साउंड इजीनियर के तौर पर काम करते थे। इस दौरान उन्हें प्रोडक्शन के अन्य लोगों को देखने का मौका मिला था। बस यही से अशोक कुमार के मन में एक्टिंग का भूत सवार हो गया। एक बार रानी के हीरो नजीमल हुसैन सेट से बिना बताए कही चले गए थे। इस दौरान सेट पर हर कोई परेशान हो गया था। तब बॉम्बे टॉकीज के हिमांशु राय ने अशोक कुमार से कहा था कि तुम देविका के हीरो बन जाओ। बस फिर बात क्या थी, यही से अशोक कुमार के एक्टर बनने की कहानी शुरू हुई।
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अशोक कुमार की पहली
अशोक कुमार की पहली फिल्म ‘जीवन नैया’ साल 1936 में रिलीज हुई थी। इसके बाद साल 1943 में फिल्म ‘किस्मत’ में अशोक कुमार एंटी-हीरो की भूमिका में नज़र आए थे। एक्टर की ये फिल्म 187 वीक तक सिनेमाघरों में चली थी। इस फिल्म के बाद वह काफी पॉपुलर हो गए और वह हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की सुपरस्टार बन गए। ऐसा कहा जाता है कि जब अशोक कुमार जब हीरो बने तब उनके घर पर काफी हड़कंप मच गया।
अशोक कुमार की टूट गई थी शादी
अशोक कुमार की तय की गई शादी भी टूट गई। इसके वाकये के बाद उनकी मां रोने लगीं और उनके पिता नागपुर गए। कुछ दिनों बाद अशोक कुमार के पिता ने उन्हें एक्टिंग छोड़ने को कहा लेकिन उस समय हिमांशु राय ने अकेले में उनके पिता से बात की। अशोक कुमार के पिता को हिमांशु राय ने समझाया जिसके बाद उनके पिता ने कहा कि यानी हिमांशु राय कहते हैं कि, अगर तुम यही काम करोगे तो बहुत ऊंचे मकाम तक पहुंचोगे। तो मुझे लगता है तुम्हें यहीं रोकना चाहिए।
पद्म भूषण से हो चुके हैं सम्मानित
साल 1988 में अशोक कुमार को फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया। साल 1999 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। अशोक कुमार ने ‘किस्मत’, आंखों में तुम हो, भारत एक खोज, वो दिन आएगा, प्यार की जीत, मिस्टर इंडिया, जवाब हम देंगे जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। 10 दिसंबर 2001 में अशोक कुमार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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