यवतमाल में दिव्यांग कोटे की नौकरियों की होगी जांच, 425 कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार
Fake Disability Certificate: यवतमाल जिला परिषद में दिव्यांग कोटे के बोगस कर्मियों की शारीरिक जांच होगी; सुप्रीम कोर्ट के अनुसार फर्जीवाड़ा मिलने पर जबरन रिटायरमेंट और पेंशन रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
- Written By: केतकी मोडक
यवतमाल जिला परिषद (सोर्स: सोशल मीडिया)
Yavatmal Disabled Quota Employee Verification: यवतमाल जिला परिषद में दिव्यांग आरक्षण कोटे का गलत इस्तेमाल कर नौकरी हथियाने वाले कथित बोगस और फर्जी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ अब शासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों की पृष्ठभूमि में यवतमाल जिला परिषद प्रशासन को अपने सभी दिव्यांग अधिकारी एवं कर्मचारियों की प्रत्यक्ष रूप से दोबारा शारीरिक जांच करानी होगी।
इस उच्च स्तरीय जांच में यदि शिक्षक या अन्य प्रशासनिक विभागों के कर्मचारी तय सरकारी मानकों के अनुरूप पात्र नहीं पाए गए, तो उन्हें सीधे अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में मची खलबली
विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, यवतमाल जिला परिषद में कार्यरत दिव्यांग श्रेणी के कर्मचारियों के दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों का प्रारंभिक दस्तावेजी सत्यापन पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके बाद बीते फरवरी माह में एक विशेष मेडिकल बोर्ड के माध्यम से प्रत्यक्ष शारीरिक जांच का पूरा कार्यक्रम भी तय किया गया था, लेकिन अकोला जिले में मेडिकल बोर्ड के लिए आवश्यक डॉक्टरों और मानव संसाधन की कमी होने के कारण यह महत्वपूर्ण प्रक्रिया बीच में ही अधूरी रह गई थी।
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अब सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद जिला परिषद प्रशासन ने इस जांच अभियान को युद्धस्तर पर तेज गति से आगे बढ़ाने की मुस्तैदी दिखाई है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार पत्की ने इस पर आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि न्यायालय के सख्त आदेशों के अनुपालन में दिव्यांग कर्मचारियों की शारीरिक जांच के लिए नई सूची और संबंधित रिपोर्ट पुनः उप संचालक स्वास्थ्य कार्यालय को तत्काल भेज दी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी जांच प्रक्रिया का तय समय सीमा में नियमित रूप से पालन किया जाएगा और यदि कोई भी कर्मचारी मानकों पर अपात्र पाया गया, तो उसकी सेवा तुरंत समाप्त करने की नियमानुसार कार्रवाई होगी।
225 शिक्षक सहित 425 कर्मचारी रडार पर
यवतमाल जिला परिषद के प्रशासनिक अभिलेखों और रिकॉर्ड के अनुसार, इस समय यवतमाल में कुल 425 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी कड़े रूप से जांच के दायरे में आ चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें सबसे अधिक संख्या प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के 225 शिक्षकों की है।
शिक्षकों के अलावा सामान्य प्रशासन विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा पंचायत विभाग के कई अन्य बड़े और छोटे अधिकारी-कर्मचारी भी इस संदिग्ध जांच सूची में शामिल हैं। इन सभी की अद्यतन और विस्तृत प्रोफाइल हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के उप संचालक कार्यालय को आवश्यक मेडिकल टेस्ट के लिए सुपुर्द कर दी गई है।
नकली पाए गए तो छिनेंगे मुफ्त के सरकारी लाभ
विभागीय सूत्रों से संकेत मिले हैं कि यदि जांच के दौरान किसी भी कर्मचारी के अंगूठे, आंख, कान या अन्य शारीरिक दिव्यांगता के दावों में कोई भी अनियमितता या फर्जीवाड़ा मेडिकल टीम के सामने उजागर होता है, तो संबंधित कर्मचारियों को अब तक दिव्यांग कोटे के आधार पर प्राप्त हुए प्रमोशन, वेतन वृद्धि और अन्य सभी भत्ते व लाभ तुरंत छोड़ने पड़ेंगे।
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इतना ही नहीं, कुछ गंभीर मामलों में जहां धोखाधड़ी का स्तर बड़ा होगा, वहां कर्मचारियों पर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का दबाव बनाया जा सकता है या सीधे अनिवार्य सेवानिवृत्ति की गाज गिरना तय है।
वहीं, जो बोगस कर्मचारी पहले ही इस कोटे का लाभ लेकर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनके मामलों में भी सरकार द्वारा पेंशन रोकने या उस पर कठोर वित्तीय जुर्माना लगाने जैसे अभूतपूर्व निर्णय लिए जाने की प्रबल संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
