यवतमाल में शिवसेना का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, जितेश नावडे और साहेबराव कांबले शिंदे गुट में शामिल

Yavatmal MLC Elections: यवतमाल में विधान परिषद चुनाव के ठीक पहले सहकार नेता जितेश नावडे और कांग्रेस के बागी साहबराव कांबले ने समर्थकों सहित शिवसेना (शिंदे गुट) में प्रवेश कर लिया है।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (सोर्स: फाइल फोटो)
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Eknath Shinde Political Strategy: राजनीति में बदलाव को स्वाभाविक माना जाता है और इसी बदलाव की एक नई मिसाल यवतमाल जिले में देखने को मिली है। सहकारिता क्षेत्र के युवा उद्यमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता जितेश नावडे ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शिवसेना में प्रवेश कर जिले की राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है। जितेश नावडे इससे पहले शिवसेना (उद्धव की सहकार आघाड़ी में सक्रिय रूप से कार्यरत थे।

सहकारिता क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़, युवाओं के बीच लोकप्रियता तथा ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक संगठनात्मक नेटवर्क को देखते हुए उनके दल परिवर्तन को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी जिला परिषद एवं स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों के मद्देनजर इस घटनाक्रम का असर राजनीतिक समीकरणों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। यह प्रवेश समारोह राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा राज्य के मृदा एवं जलसंधारण मंत्री संजय राठौड़ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिवसेना विदर्भ पश्चिम के सहसंपर्क प्रमुख पराग पिंगले प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

इस दौरान कार्यकर्ताओं ने शिवसेना और पार्टी नेतृत्व के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की, जिससे पूरा सभागार उत्साह से गूंज उठा। समारोह में जितेश नावडे के करीबी समर्थक माने जाने वाले राजमोहन गिरी ने भी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ शिवसेना का दामन थाम लिया। इससे पार्टी की संगठनात्मक ताकत और बढ़ने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है।

साहेबराव कांबले ने थामा धनुष-बाण

यवतमाल जिला स्थानीक स्वराज संस्था विधान परिषद चुनाव के ऐन मौके पर कांग्रेस को पटखनी देनेवाले पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार साहबराव कांबले ने आखिरकार रविवार को मुंबई में अधिकृत रूप से शिवसेना शिंदे समूह में प्रवेश किया।

केवल सप्ताहभर पहले कांबले ने पूरी महाविकास आघाडी को अंधेरे में रखते हुए चुनाव से अपना नाम वापस ले लिया था। उन्होंने अब सीधे सत्ताधारियों के पार्टी में प्रवेश करने से यवतमाल की राजनीति में भूचाल आ गया है।

इस गतिविधि से जिले में कांग्रेस कमजोर हो गई है। विधान परिषद चुनाव के मैदान से नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से दो दिनों पहले साहबराव कांबले को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। कार्रवाई को 24 घंटे बीतने से पहले ही कांबले ने मुंबई पहुंचकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पालकमंत्री संजय राठोड की उपस्थिति में शिवसेना का दामन थाम लिया।

भ्रष्टाचार व जातिवाद के आरोप

शिवसेना पार्टी प्रवेश से पूर्व साहबराव कांबले ने कांग्रेस नेताओं और स्थानीक जिलाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। साहबराव कांबले ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब केवल पैसों की भाषा करती है। जबरन उम्मीदवारी आवेदन भरवाने के बाद पैसों की डिमांड की गई। इतना ही नहीं तो जिलाध्यक्ष ने बार बार पिछडावर्गीय कहते हुए अपमान किया। अपने स्वाभिमान के लिए और कांग्रेस की कुटील नीतियों का विरोध करने के लिए उन्होंने यह निर्णय लेने का दावा किया।

दगाबाजी छिपाने के लिए दिए बयान

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एड। सचिन नाईक ने साहबराव कांबले के सभी आरोपों को खारिज करते हुए बेबुनियाद बताया। जिलाध्यक्ष ने बताया कि पार्टी ने कांबले जैसे कार्यकर्ता को सीधे विधान परिषद की उम्मीदवारी देकर बडा मौका दिया था। लेकिन उन्होंने अपनी दगाबाजी को छिपाने के लिए बेबुनियादी आरोप मढे है।

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