नहीं सुलझा राजनीतिक गतिरोध, नासिक MLC चुनाव में महायुति की मुश्किल बरकरार; मैदान में फिर गिरीश महाजन

Nashik MLC Election: नासिक स्थानीय स्वराज्य संस्था विधान परिषद चुनाव में महायुति का राजनीतिक गतिरोध जारी है। महाजन ने लगातार बैठकों के जरिए समाधान की कोशिश की, लेकिन स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी।
Political deadlock remains unresolved; Mahayuti's troubles persist in the Nashik MLC election; Girish Mahajan steps into the fray.
नासिक एमएलसी चुनाव, नरेंद्र दराडे, गोकुल गीते,प्रसाद हिरे(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nashik Legislative Council Poll: नासिक स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद चुनाव में महायुति के सामने बना राजनीतिक गतिरोध अभी भी कायम है। इसी कारण राज्य के मंत्री गिरीश महाजन रविवार को एक बार फिर नासिक पहुंचे। पिछले दो दिनों से चल रहे मनाने और समझाने के प्रयासों को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने नासिक में डेरा डालते हुए विभिन्न बैठकों का आयोजन किया। देर रात तक चर्चाएं जारी रहीं, लेकिन कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया।

चुनाव मैदान में तीन उम्मीदवारों के बने रहने से राजनीतिक मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नरेंद्र दराडे के सामने निर्दलीय उम्मीदवार गोकुल गीते और प्रसाद हिरे ने चुनौती खड़ी कर दी है, इससे चुनावी समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं।नगरसेवकों के मतों का महत्व बढ़ने के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद भी गोकुल गीते और प्रसाद हिरे ने अपनी उम्मीदवारी बरकरार रखी है, जिससे राजनीतिक गतिविधियां तेज हो महायुति की ओर से दोनों का समर्थन हासिल करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। शुक्रवार और शनिवार को मंत्री उदय सामंत तथा गिरीश महाजन ने नासिक में रुककर समाधान निकालने का प्रयास किया था, लेकिन कोई निर्णायक रास्ता नहीं निकल सका।

मतों की अहमियत बढ़ी, घोड़ाबाजार की चर्चाओं से सियासी माहौल गरमाया

इसके बाद रविवार को महाजन ने फिर से मोर्चा संभालते हुए विभिन्न स्तरों पर संपर्क और चर्चा का सिलसिला जारी रखा। इस बीच नगरसेवकों के मतों का महत्व बढ़ने के साथ ही संभावित आर्थिक लेन-देन की चर्चाएं भी जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय स्वराज्य संस्था निर्वाचन क्षेत्र की चुनाव प्रक्रिया में कथित घोड़ाबाजार के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। इस बार भी मतों की कीमत बढ़ने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। हालांकि इन चर्चाओं की किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महायुति के नेता सतर्क

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि मुकाबला त्रिकोणीय बना रहता है तो प्रत्येक मत निर्णायक साबित होगा। ऐसी स्थिति में किसी उम्मीदवार के समर्थन देने या चुनाव से हटने का सीधा असर नगरसेवकों के राजनीतिक गणित पर पड़ सकता है। यही कारण है कि महायुति के नेता भी फिलहाल बेहद सतर्क रणनीति अपनाते दिखाई दे रहे हैं। महायुति की ओर से शिवसेना के नरेंद्र दराडे आधिकारिक उम्मीदवार है।

वहीं भाजपा के पूर्व नगरसेवक गणेश गीते के भाई गोकुल गीते ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी दावेदारी कायम रखी है। इसके अलावा पूर्व मंत्री बळीराम हिरे के पुत्र प्रसाद हिरे भी चुनाव मैदान में हैं। इस वजह से यह चुनाव पूरे राज्य के राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

मतों का बढ़ा महत्व

यदि त्रिकोणीय मुकाबला कायम रहता है तो हर एक मत निर्णायक साबित होगा। इसी कारण सभी उम्मीदवार और उनके समर्थक मतदाता नगरसेवकों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं। मनुहार, बैठकों और राजनीतिक संपर्क अभियानों में तेजी आ गई है। नगरसेवकों को अपने पक्ष में करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में है।

नगरसेवक ही हैं मतदाता

इस चुनाव में नासिक और मालेगांव महानगरपालिकाओं के साथ-साथ जिले की विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों के नगरसेवक ही मतदाता हैं। इसलिए पूरे चुनाव का गणित नगरसेवकों की भूमिका पर निर्भर है। आने वाले दिनों में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों और संभावित समर्थन संबंधी निर्णयों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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