किसान कर्जमाफी घोटाला! 2 लाख की ऋणमाफी के नाम पर माफ हुए 95 हजार, किसानों में नाराजगी
Dharashiv Farmers Loan Waiver Controversy: 2 लाख रुपये की कर्जमाफी में विसंगतियों का आरोप। धराशिव के गंधोरा गांव में किसानों का हंगामा, कृषि मंत्री ने दी सफाई।
- Written By: अनिल सिंह
किसान कर्जमाफी योजना का कजिसनों को नहीं मिल रहा लाभ (फोटो क्रेडिट-X)
Farmers Loan Waiver Controversy: महाराष्ट्र सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये तक की किसान कर्जमाफी योजना को लेकर राज्य के धराशिव जिले से बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और असंतोष के मामले सामने आ रहे हैं। जिले के तुलजापुर तालुका अंतर्गत गंधोरा गांव के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार की ऋणमाफी सूची में भारी विसंगतियां हैं, जिसके कारण पात्र किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसानों का कहना है कि 2 लाख रुपये की कर्जमाफी की घोषणा केवल कागजी साबित हो रही है और असल में बैंक खातों में आधी-अधूरी राशि ही माफ की जा रही है।
1.54 लाख के कर्ज पर मिले केवल 94 हजार
गंभीर अनियमितताओं का खुलासा करते हुए गंधोरा गांव के किसानों ने बैंक पासबुक के सबूतों के साथ मीडिया के सामने अपना दर्द साझा किया। गांव के किसान जीवन विष्णु पाटिल ने बताया कि उन पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र का 1,54,738 रुपये का बकाया ऋण था, लेकिन जारी सूची में उनकी कर्जमाफी की राशि केवल 94,427 रुपये ही दिखाई गई है।
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इतना ही नहीं, किसानों का आरोप है कि बैंक अधिकारी कह रहे हैं कि जब तक वे बकाया 60 हजार रुपये का भुगतान नहीं करेंगे, तब तक 94 हजार रुपये की कर्जमाफी का लाभ भी उनके खाते में लागू नहीं किया जाएगा। गांव के करीब 80 प्रतिशत किसान ऐसी ही विसंगतियों का सामना कर रहे हैं।
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2 लाख से कम का कर्ज है तो न चुकाएं पैसा
कर्जमाफी सूची में मचे इस बवाल और किसानों के आक्रोश के बीच महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने किसानों से संयम बरतने की अपील की है। कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी किसान पर 2 लाख रुपये से कम का कर्ज है, तो उसे किसी भी हाल में बैंक में पैसे जमा करने की जरूरत नहीं है और न ही बैंक अधिकारी किसानों को परेशान कर सकते हैं।
भरने ने कहा कि जिन किसानों के नाम या राशि में विसंगति है, उनका मामला तकनीकी कागजी कमियों के कारण अटका हो सकता है। सरकार द्वारा जल्द ही कर्जमाफी की अगली संशोधित सूची जारी की जाएगी।
फसल बीमा और दोहरे लाभ को लेकर भी शिकायतें
किसान कर्जमाफी के अलावा क्षेत्र के किसान फसल बीमा के दावों को लेकर भी परेशानियां झेल रहे हैं। किसानों ने शिकायत की है कि बीमा कंपनियां यह शर्त लगा रही हैं कि सहकारी या राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों को अन्य बीमा लाभ नहीं मिलेंगे।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने बताया कि उन्होंने इस मनमानी नीति को रोकने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखा है ताकि किसानों के अधिकारों का हनन न हो।
