यवतमाल: फसल बीमा योजना की खामियों के खिलाफ शिवसेना का हल्लाबोल; पीएम मोदी को भेजा ज्ञापन, विशेष सहायता की मांग
Yavatmal Farmers News: यवतमाल में अतिवृष्टि से फसलों के भारी नुकसान के बावजूद किसानों को फसल बीमा न मिलने पर शिवसेना ने पीएम को ज्ञापन भेजा। सैटेलाइट आधारित फसल आकलन पद्धति पर गंभीर आपत्ति जताई।
- Written By: रूपम सिंह
जिलाधिकारी विकास मीना को ज्ञापन सौंपते (सोर्स: नवभारत फाईल फोटो)
Yavatmal PM Fasal Bima Yojana: यवतमाल केंद्र सरकार ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्रियान्वित कर राहत देने का प्रयास किया है। लेकिन प्रत्यक्ष रूप से योजना को अमल में लाते समय खामियां पैदा कर दी है। इन खामियों के चलते अनेक नुकसानग्रस्त किसान फसल बीमा लाभ से वंचित है। यह गंभीर दृश्य यवतमाल जिले सहित पूरे महाराष्ट्र में देखने को मिल रहा है।
इसीलिए योजना की खामियों को दूर करने के साथ ही नुकसानग्रस्त किसानों को न्याय दिलाने का कदम उठाने के संबंध में मंगलवार को शिंदे शिवसेना के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी विकास मीना के माध्यम से एक ज्ञापन पीएम को भेजा है। यवतमाल जिले में औसत से अधिक 30 से 40 फीसदी अधिक बारिश हुई है। 110 राजस्व सर्कलों में से 108 राजस्व सर्कलों में दो अथवा उससे अधिक अतिवृष्टि हुई है।
जिले में सोयाबीन, कपास व तुअर फसल का बडे पैमाने पर नुकसान हुआ है। सोयाबीन के लगभग 2।64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में से 2।9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। अनेक राजस्व मंडलों की अंतिम पैसेवारी 50 से कम है। प्रत्यक्ष निरीक्षण करने पर खेत फसलों का भारी नुकसान हुआ है। यवतमाल जिले से सटे नांदेड, वाशिम, अमरावती, वर्धा व चंद्रपुर जिले फसल बीमा के लिए पात्र ठहराए गए है।
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लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यवतमाल जिले का एक भी राजस्व मंडल पात्र नहीं ठहराया गया है। जिससे किसानों में नाराजगी बढ गई है। इसीलिए केंद्र सरकार ने जिले के किसानों के हित में योग्य निर्णय लेकर जिले को फसल बीमे के दायरे में लाना चाहिए। शिवसेना ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पिछले पाँच वर्षों के कम औसत उत्पादन के बजाय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मान्य औसत उत्पादन को
आधार माना जाए। साथ ही, केवल 200 वर्ग मीटर क्षेत्र में किए गए फसल कटाई प्रयोग के आधार पर पूरे मंडल का भविष्य तय न किया जाए। प्रत्यक्ष स्तर पर खेत निरीक्षण अनिवार्य किया जाए। यवतमाल जिले में हुए नुकसान का विशेष पुनर्मूल्यांकन कर प्रभावित किसानों को तत्काल विशेष सहायता घोषित की जाए, ऐसी प्रमुख मांगें निवेदन में शामिल हैं।
इस संदर्भ में जिले के पालकमंत्री संजय राठौड़ ने भी मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर यवतमाल जिले को फसल बीमा का लाभ शीघ्र दिलाने की मांग की है। निवेदन सौंपते समय शिवसेना जिला संपर्क प्रमुख हरिहर लिंगनवार, जिला संपर्क प्रमुख श्रीधर मोहोड, गजानन डोमाले, यशवंत पवार, राजूदास जाधव, संजय हातगांवकर, संजय रंगे आदि उपस्थित थे।
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सैटेलाइट आधारित फसल आकलन पद्धति पर गंभीर आपत्ति
निवेदन में वर्तमान सैटेलाइट आधारित फसल मूल्यांकन पद्धति पर गंभीर आपत्तियों दर्ज की गई हैं। अतिवृष्टि के कारण खेतों में बड़े पैमाने पर खरपतवार (तण) उग आए थे। सैटेलाइट चित्रों में खेत हरे-भरे दिखाई दिए, लेकिन वास्तविक स्थिति में सोयाबीन में फलियां नहीं लगी थी और कपास की टहनियां (बोंडे) सड़ चुकी थीं। केवल सैटेलाइट इमेज के आधार पर आकलन करना किसानों के साथ अन्याय और उनकी आंखों में धूल झोंकने जैसा है, ऐसा आरोप लगाया गया है।
