अवैध रेत तस्करी मामला (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
Chhatari Sand Ghat Painganga River: उमरखेड़ संभाग में पैनगंगा नदी के चातारी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की सूचना मिलने पर 30 मार्च को यवतमाल एलसीबी (पुसद कैंप) की टीम मौके पर पहुंची। वहां 6 ट्रैक्टर रेत से भरे हुए पाए गए। पुलिस कार्रवाई की तैयारी कर ही रही थी कि उबाठा सांसद के पुत्र के पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई।
उसके साथ 300 से 500 लोगों की भीड़ थी, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकाते हुए सभी ट्रैक्टरों को पैनगंगा नदी के मराठवाड़ा क्षेत्र (दिघी शिवार) में हटवा दिया। इस दौरान राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद होते हुए भी मूकदर्शक बने रहे, जिससे पुलिस को मजबूरन बिना कार्रवाई किए लौटना पड़ा। पैनगंगा नदी विदर्भ और मराठवाड़ा की सीमा बनाती है।
जानकारी के अनुसार, मराठवाड़ा के दिघी क्षेत्र से 5-6 ट्रैक्टर चातारी (विदर्भ सीमा) में आकर अवैध रेत खनन कर रहे थे। सूचना मिलते ही स्थानीय अपराध शाखा की टीम ने ट्रैक्टर पकड़ लिए थे, लेकिन रेत तस्करों ने सांसद के पुत्र को बुला लिया। उसके पहुंचने के बाद पुलिस पर दबाव बनाया गया और ट्रैक्टरों को मराठवाड़ा क्षेत्र में खड़ा कर दिया गया। इस दौरान भारी भीड़ जुटने से तनावपूर्ण माहौल बन गया। चातारी मंडल के राजस्व अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम के दौरान निष्क्रिय रहे, जिसकी चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है।
सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों तक जानकारी पहुंचने के बावजूद इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे पुलिस और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मौके पर एलसीबी टीम, अतिरिक्त पुलिस बल और हिमायतनगर पुलिस भी मौजूद थी। इस मामले में अधिकारियों ने बात करने के लिए कॉल भी रिसीव नहीं किया।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना का वीडियो बना रहे एक व्यक्ति के साथ मारपीट भी की गई। इस घटना के बाद आम लोगों में यह चर्चा तेज है कि जहां आम नागरिकों पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं राजनीतिक दबाव के चलते रेत तस्करों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है, जिससे प्रशासन की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।