उमरखेड़ में रेत माफियाओं पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', तड़के 4 बजे गुरफली घाट पर रेड, लाखों की रेत समेत टिप्पर जब्त!

Umarkhed Sand Mafia: उमरखेड़ के गुरफली रेत घाट पर तड़के छापेमारी, अवैध रेत परिवहन करता टिप्पर जब्त। नीलामी के 2 महीने बाद भी ठेकेदारों को नहीं मिला कब्जा, माफियाओं का बोलबाला।
Raid on Gurphali sand ghat in Umarkhed; Tipper seized for illegal mining. Despite 8 auctions, contractors await possession as sand mafia dominates.
गुरफली रेत चोरी मामला (सौजन्य-नवभारत)
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Painganga River Sand Mining: शुक्रवार 23 जनवरी की तड़के करीब 4 बजे, गुरफली रेत घाट से अवैध रूप से रेत उत्खनन कर बिना अनुमति परिवहन करते हुए एमएच 06 एसी 1357 नंबर का टिप्पर विडूल के पास पकड़ा गया। आगे की दंडात्मक कार्रवाई के लिए वाहन जब्त कर तहसील कार्यालय परिसर में जमा किया गया।

यह कार्रवाई उपविभागीय अधिकारी सखाराम मुले और तहसीलदार राजेश सुरडकर के मार्गदर्शन में मंडल अधिकारी गजानन सुरोशे तथा वाहन चालक जय महामुने द्वारा की गई। तालुका में सावलेश्वर, सिंदगी, कोपरा, दिघडी, गुरफली, तिवडी, नांदला और दिवटपिंपरी इन 8 रेत घाटों की नीलामी को लगभग दो महीने हो चुके हैं। नीलामीधारकों ने प्रशासन के पास निर्धारित राशि भी जमा कर दी है।

तस्करों की चांदी-ही-चांदी

इसके बावजूद उन्हें अब तक घाटों का वास्तविक कब्जा नहीं दिया गया है। इस देरी के पीछे “रेत माफिया” का दबाव होने की चर्चा है। वर्तमान में नदी में पर्याप्त पानी होने के कारण निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर जारी हैं, जिससे रेत की मांग बढ़ी है और तस्करों की चांदी हो रही है। नीलामीधारकों को आशंका है कि यदि जल्द ही घाटों का कब्जा नहीं मिला, तो तब तक तस्कर रेत का बड़ा हिस्सा निकाल ले जाएंगे।

इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। नागरिकों का सवाल है कि जब प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध रेत तस्करी हो रही है, तब जिला प्रशासन मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? क्या इसमें कुछ अधिकारी और राजनीतिक तत्व शामिल हैं यह सवाल अब खुलकर उठने लगा है।

नीलामी के बाद भी नहीं मिला कब्जा

हर साल की तरह इस वर्ष भी जिला प्रशासन की कथित ढिलाई का फायदा उठाते हुए उमरखेड़ तालुका से होकर बहने वाली पैनगंगा नदी के घाटों पर रेत तस्करों का दबदबा बढ़ गया है। प्रशासन के कुछ ईमानदार अधिकारी दिन-रात तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के कारण तस्कर और अधिक ताकतवर बनते जा रहे हैं, ऐसा नागरिकों का कहना है।

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