प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्तें अटकीं, यवतमाल में लाभार्थियों संग उबाठा का झुनका-भाकर आंदोलन

PM Awas Yojana Delay: यवतमाल में पीएम आवास योजना की किस्तें न मिलने पर उबाठा और लाभार्थियों ने पंचायत समिति में 'झुनका भाकर' आंदोलन किया। बीडीओ के अनुसार तकनीकी कारणों से देरी हुई।
Yavatmal PMAY Beneficiaries Jhunka Bhakar Protest
यवतमाल PM Awas लाभार्थियों झुनका-भाकर आंदोलन में (सोर्स - नवभारत)
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Yavatmal PMAY Beneficiaries Jhunka Bhakar Protest: प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के अंतर्गत अपने सपनों का आशियाना बना रहे सैकड़ों गरीब लाभार्थियों को पिछले कई महीनों से सरकारी अनुदान की किस्तें नहीं मिल पाई हैं। किस्तों के अटकने से यह परिवार बेहद गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर शिवसेना (उबाठा) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बुधवार को गोधनी रोड स्थित पंचायत समिति कार्यालय के भीतर एक अनोखा आंदोलन शुरू किया।

उबाठा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पीड़ित घरकुल लाभार्थियों के साथ मिलकर पंचायत समिति परिसर में ही जमीन पर बैठकर 'झुनका भाकर' खाते हुए सरकार की लचर कार्यप्रणाली का कड़ा विरोध जताया।

यवतमाल तहसील में 2,000 से अधिक लाभार्थियों की किस्तें अटकीं

आंदोलन के दौरान सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल यवतमाल तहसील के ही कुल 142 लाभार्थियों की पहली किस्त, 1,002 लाभार्थियों की दूसरी किस्त तथा 1,025 लाभार्थियों की तीसरी किस्त अब तक सरकार स्तर पर लंबित है। इन गरीब लाभार्थियों को फरवरी 2026 के बाद से प्रशासन की ओर से फूटी कौड़ी भी प्राप्त नहीं हुई है। हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहां सरकार पैसे नहीं दे रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन द्वारा इन लाभार्थियों पर घर का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के लिए मानसिक दबाव बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं, समय पर काम न होने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई की चेतावनी वाले नोटिस भी जारी किए गए थे, जिससे जनता में भारी रोष है।

मकान तोड़े, पर नई छत नसीब नहीं

शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब लाभार्थियों ने तो प्रशासन के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए अपने पुराने और मिट्टी के घर तोड़ दिए और नए पक्के मकानों का निर्माण शुरू कर दिया। लेकिन सरकार की ओर से समय पर वित्तीय अनुदान नहीं मिलने के कारण अधिकांश मकानों के निर्माण कार्य बीच में ही अधूरे रह गए हैं। अब चूंकि आगामी दिनों में भारी बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में इन अनेक गरीब परिवारों के सामने रहने और सिर छिपाने की एक बहुत बड़ी और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार की ओर से पहले 15 मई और फिर 30 मई तक शत-प्रतिशत भुगतान किए जाने का खोखला आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक यह राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा नहीं हो सकी है।

जिला परिषद का घेराव करने की दी बड़ी चेतावनी

उबाठा के नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस आंदोलन के बाद भी बकाया राशि का तत्काल भुगतान नहीं किया गया, तो यवतमाल के सभी प्रभावित लाभार्थी अपने मासूम बच्चों और परिवारों सहित जिला परिषद और पंचायत समिति कार्यालय परिसर में ही डेरा जमाकर बेमियादी रहने को मजबूर होंगे। इस व्यापक और उग्र आंदोलन का नेतृत्व यवतमाल जिला संपर्क प्रमुख राजेंद्र गायकवाड़, जिला प्रमुख किशोर इंगले, उपजिला प्रमुख राजेंद्र घोटे तथा तहसील प्रमुख गजानन पाटील कर रहे थे, जिनमें भारी संख्या में पीड़ित घरकुल लाभार्थी शामिल हुए।

स्पर्श प्रणाली के कारण हो रही है देरी

इस पूरे हंगामे और उबाठा के आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए पंचायत समिति के गुटविकास अधिकारी (बीडीओ) पद्माकर मड़ावी ने प्रशासनिक पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि विभाग स्तर पर प्रक्रिया जारी है और बीते 27 और 28 मई को कई लाभार्थियों के खातों में एफटीओ के मार्फत रकम ट्रांसफर की जा चुकी है।

बीडीओ मड़ावी ने तकनीकी खराबी की बात स्वीकार करते हुए कहा कि वर्तमान में 'स्पर्श' डिजिटल प्रणाली क्रियान्वित रहने से पैसे वास्तव में बैंक खातों में जमा होने में थोड़ी तकनीकी देरी हो रही है। अब तक 750 लाभार्थियों के खातों में लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये की राशि सफलतापूर्वक जमा कराई जा चुकी है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन लाभार्थियों को तकनीकी त्रुटियों के कारण अब तक घरकुल योजना की किस्तों का लाभ नहीं मिल पाया है, उनके खातों में किस्त की रकम जल्द से जल्द जमा कराने को लेकर हमारा विभाग मंत्रालय स्तर पर लगातार संपर्क बनाए हुए है और लगातार फॉलोअप लिया जा रहा है।