कहीं जहर तो कहीं फांसी, यवतमाल के 16 तहसीलों में पसरा मातम; जनवरी में हर दूसरे दिन एक किसान की मौत
Yavatmal Farmer Suicide: यवतमाल में जनवरी में ही 25 किसानों ने की आत्महत्या! 'मिशन उभारी' के बावजूद नहीं थम रहा मौत का सिलसिला। सोयाबीन-कपास उत्पादकों पर आर्थिक संकट गहराया।
- Written By: प्रिया जैस
यवतमाल में किसान आत्महत्या (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mission Ubhari Maharashtra: यवतमाल जिले में किसान आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही फसलों को नहीं मिल रहे उचित दाम के चलते किसान फांसी लेकर या फिर जहर पीकर आत्महत्या कर रहे हैं। हैरत वाली बात यह कि साल 2026 के शुरुआती जनवरी महीने में ही जिला प्रशासन के पास 25 किसान आत्महत्या के मामले दर्ज हो चुके हैं।
बता दें कि 29 दिसंबर 2025 में केलापुर में रहनेवाले किसान धीरज ज्ञानेश्वर सामृतवार ने जहर पीकर आत्महत्या की थीं। इसके बाद 2 जनवरी 2026 को झरी जामनी तहसील के शिबला में किसान ने जहर गटका,उसी दिन घाटंजी तहसील के घोटी में किसान ने कुंए में कूदकर जान दी, वहीं महागांव तहसील के शिरपुर में 5 जनवरी को किसान ने फांसी लेकर आत्महत्या की।
आत्महत्या के मामले आए सामने
दारव्हा तहसील के मांगकिन्ही में 7 जनवरी को किसान का शव कुंए में पाया गया। उमरखेड तहसील के बांभरखेडा में 10 जनवरी को किसान ने जहर पीकर जान दे दी। 12 जनवरी को झरीजामनी के गणेशपुर, 15 जनवरी को भेंडाला में किसान ने जहर पीकर आत्महत्या की।
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बाभुलगांव तहसील के मालापुर, मुस्ताबाद, यवतमाल के चौकी झुली, दिग्रस के रूई तालाब, दिग्रस के माल हिवरा, बाभुलगांव तहसील के डेहणी, यवतमाल के लोणी, नेर तहसील के पिंप्री कलगा, कलंब तहसील के कोठा, घाटंजी तहसील के ससाणी, दिग्रस तहसील के रूई मोठी, रालेगांव तहसील के जागजई, आर्णी तहसील के परसोडा, केलापुर तहसील के तलगटाकली, खैरगांव बु., पांढरकवडा में किसान आत्महत्या के मामले सामने आए है।
प्रशिक्षण से समुपदेशन तक, किसानों को कई मदद
जिलाधिकारी विकास मीना से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 के पहले ही महीने में जिले में 25 किसान आत्महत्याओं के मामले दर्ज होना गंभीर चिंता का विषय है। किसानों पर बढ़ते संकट को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से ‘मिशन उभारी अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसके तहत संकटग्रस्त किसान परिवारों को बड़े पैमाने पर मदद उपलब्ध कराई जा रही है।
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इस अभियान के माध्यम से आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहे किसानों को तात्कालिक राहत, कर्जबोझ कम करने के लिए वित्तीय सहायता, किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक मदद, मानसिक स्वास्थ्य एवं समुपदेशन सेवाएं, आधुनिक एवं टिकाऊ खेती के लिए प्रशिक्षण, किसानों की आय बढ़ाने हेतु विविध आजीविका साधनों को प्रोत्साहन जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएँ लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों पर आए संकट को कम कर उन्हें मजबूती प्रदान करना है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
कर्जमाफी के बजाय दीर्घकालीन कर्ज नीति हो : तिवारी
इस पार्श्वभूमि राज्य सरकार के वसंतराव नाईक शेतकरी स्वावलंबन मिशन के (VNSSM) पूर्व अध्यक्ष किशोर तिवारी ने बताया कि बार-बार कर्जमाफी देने के बजाए दीर्घकालीन कर्ज नीति को अमल में लाना जरूरी है। इसके अलावा नकदी फसलों के बजाय साबुत अनाज उत्पादन के लिए किसानों को योग्य प्रोत्साहन देना जरूरी है। कपास और सोयाबीन जैसी फसलों से ही साल 1998 से किसान आत्महत्या का सिलसिला चलते आ रहा है।
- नवभारत लाइव पर यवतमाल से रवीश वाघ की रिपोर्ट
