विदर्भ जिनिंग आग मामले में महावितरण को झटका, कोर्ट के आदेश पर कार्यालय का सामान कुर्क
Yavatmal Mahavitaran: यवतमाल में दीवानी न्यायालय के आदेश पर महावितरण के विभागीय कार्यालय में कुर्की की कार्रवाई की गई। जिनिंग में आग से हुए नुकसान के मुआवजे का भुगतान नहीं करने पर कोर्ट ने कारवाई की।
- Written By: आंचल लोखंडे
यवतमाल महावितरण (सोर्सः सोशल मीडिया)
Vidarbha Ginning Fire Case: यवतमाल शहर स्थित महावितरण के विभागीय कार्यालय में शुक्रवार को दीवानी न्यायालय के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान कार्यकारी अभियंता पुरुषोत्तम चव्हाण के कक्ष से अलमारी, कुर्सी, कंप्यूटर, प्रिंटर, एलईडी टीवी, एसी सहित विभिन्न विभागों से 21 कुर्सियां, 28 प्लास्टिक की कुर्सियां, 21 कंप्यूटर, 21 सीपीयू और 21 प्रिंटर जब्त किए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 में नेर स्थित विदर्भ जिनिंग के संचालक मोबिन खान नूर खान की जिनिंग में भीषण आग लग गई थी। आरोप है कि यह आग महावितरण के ट्रांसफॉर्मर (डीपी) में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण लगी थी। शॉर्ट सर्किट से निकली चिंगारियों ने जिनिंग परिसर में रखे कपास को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे जिनिंग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी और दमकल विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था।
कोर्ट के आदेश पर महावितरण कार्यालय में कुर्की
जिनिंग संचालक का आरोप था कि महावितरण की डीपी में तकनीकी खराबी और शॉर्ट सर्किट के कारण यह हादसा हुआ। नुकसान की भरपाई को लेकर मामला पहले संबंधित विभाग और बाद में न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। यवतमाल जिला ग्राहक आयोग ने भी महावितरण कंपनी को जिनिंगसंचालक को मुआवजा देने के निर्देश दिए थे, लेकिन विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सम्बंधित ख़बरें
गणेशोत्सव 2026: कोंकण जाने वालों के लिए MSRTC चलाएगा 5,220 स्पेशल ST बसें, समूह बुकिंग पर मिलेगी 100% तक छूट
रवि राणा के टिकट काटने वाले बयान से भाजपा में बढ़ी नाराजगी, राजेश वानखड़े बोले- दखलअंदाजी बंद करें
FDA तलवार से मच्छर मारने की कोशिश कर रही; Amazon के लाइसेंस निलंबन पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
स्वाद के चक्कर में सेहत का सौदा! FDA की रडार पर नागपुर के होटल और हॉस्टल, 24 दिनों में मिली 121 शिकायतें
21 कंप्यूटर और 21 प्रिंटर जब्त
इतना ही नहीं, करीब एक वर्ष पूर्व मुआवजे के संबंध में नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन महावितरण ने उस पर भी कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जिनिंग संचालक ने दीवानी न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद महावितरण कार्यालय की संपत्ति जब्त करने के आदेश जारी किए, आदेश के अनुसार न्यायालय के मुख्य बेलिफ आर. वी. वाढे के नेतृत्व में पांच बेलिफों की टीम, पक्षकार के अधिवक्ता आकाश होटे के साथ महावितरण के विभागीय कार्यालय पहुंची। यहां कार्यकारी अभियंता और उपअभियंता के कक्षों से कंप्यूटर, प्रिंटर, कुर्सियां और अलमारियां जब्त करने की कार्रवाई की गई।
अधीक्षक अभियंता ने मांगे और 15 दिन
जब्ती की कार्रवाई टालने के लिए महावितरण के अधीक्षक अभियंता रूपेश टेंभूर्ण ने न्यायालय की बेलिफ टीम और पक्षकार से 15 दिन का समय देने का अनुरोध किया। हालांकि पक्षकार ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद न्यायालय की टीम ने नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी।
ये भी पढ़े: यवतमाल में बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण के विरोध में डॉक्टरों का मोर्चा, तीसरे दिन भी आंदोलन जारी
कई कई सामान सामान कर्मचारियों के निजी
जब न्यायालय की टीम कार्यालय में जब्ती की कार्रवाई कर रही थी। तब कुछ कर्मचारियों ने दावा किया कि उनके कक्ष में रखा कुछ सामान उन्होंने निजी खर्च से खरीदा है, इसलिए उसे जब्त नहीं किया जाना चाहिए। इस बात को लेकर कर्मचारियों और पक्षकार के अधिवक्ता के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद मैं पक्षकार की सूझबूझ से मामला शांत हुआ और कार्रवाई बिना किसी व्यवधान के पूरी की गई।
