यवतमाल में बीएचएमएस-सीसीएमपी पंजीकरण के विरोध में डॉक्टरों का मोर्चा, तीसरे दिन भी आंदोलन जारी
IMA Yavatmal: यवतमाल में बीएचएमएस-सीसीएमपी डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण देने के विरोध में IMA का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। रेजिडेंट डॉक्टरों ने मोर्चा निकाला।
- Written By: आंचल लोखंडे
यवतमाल डॉक्टर आंदोलन (सो्र्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Doctors Protest: बीएचएमएस-सीसीएमपी (CCMP) डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में पंजीकरण देने के प्रस्ताव के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा 4 अगस्त से शुरू किए गए राज्यव्यापी आंदोलन को यवतमाल में तीसरे दिन भी व्यापक समर्थन मिला। गुरुवार को स्वर्गीय वसंतराव नाईक जिला शासकीय अस्पताल तथा शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय के निवासी चिकित्सकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला। आंदोलन में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर्स (MARD), एएसएमआई तथा विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टर संगठन भी सहभागी हुए।
चिकित्सा सेवाएं बंद गुरुवार को भी चिकित्सकों के आंदोलन के चलते यवतमाल शहर के अधिकांश निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में ओपीडी, नियमित जांच और निर्धारित चिकित्सा सेवाएं बंद रहीं। हालांकि आपातकालीन एवं आकस्मिक मरीजों की सेवाएं जारी रखी गईं, ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। आईएमए ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा, वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित आधुनिक चिकित्सा पद्धति तथा चिकित्सा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
समर्थन के लिए रेजिडेंट डॉक्टर भी उतरे मैदान में
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर्स (MARD), स्वर्गीय वसंतराव नाईक शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, यवतमाल के निवासी डॉक्टरों ने भी बीएचएमएस-सीसीएमपी डॉक्टरों के पंजीकरण और कथित क्रॉस-प्रैक्टिस के विरोध में राज्यव्यापी आंदोलन का समर्थन किया। केंद्रीय मार्ड के निर्देशानुसार 5 अगस्त से आंदोलन शुरू किया गया। इससे पहले 4 अगस्त को अधिष्ठाता को आआंदोलन संबंधी पत्र सौंपा गया था।
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यवतमाल में IMA आंदोलन को मिला समर्थन
मार्ड ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति के खिलाफ नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली, मरीजो की सुरक्षा और चिकित्सा नियमन की वैधानिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए है। आंदोलन के दौरान नियमित सेवाएं प्रभावित रहेंगी, लेकिन पहले 24 घंटे तक आपातकालीन सेवाएं, कैजुअल्टी तथा जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं जारी रहेंगी। आगे की रणनीति केंद्रीय मार्ड के निर्देशानुसार तय की जाएगी।
रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी किया प्रदर्शन
आंदोलन में मार्ड के सचिव डॉ. अमोल देशपांडे, डॉ. अरविंद कुडमेथे, डॉ. शरद राखुंडे, डा.टी.सी. राठोड, डॉ. आशीष तावडे, डॉ. माने, डॉ. शिरभाते, डॉ. प्रशांत कासारे, डॉ. विजय मून, डॉ. स्वपनिल मदनकर, डॉ. समीर राठोड, डॉ. चिरडे, डॉ. उमरे, डॉ. अमर सुरजुसे, डॉ. जोशी, डॉ. कुलकर्णी सहित डॉ. शुभम यादव, डॉ. स्नेहा ऐनलवार, उपाध्यक्ष डॉ. रोहित राठोड, संयुक्त सचिव, डॉ. प्राची बिसेन, डॉ. समाधान नागरे, डॉ. लिमाभी गोगोई, डॉ. अथर्व इंगले, डॉ. जिगर पांड्या, डॉ. तुषार सांगोडे, डॉ. प्रियांका बाजोरिया, डॉ. साहिल भुतडा आदि शामिल हुए।
हड़ताल के दौरान डॉक्टर पर हमले की कोशिश
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की ओर से घोषित राज्यव्यापी हड़ताल का असर अब प्रदेशभर में दिखाई देने लगा है। गुरुवार को यवतमाल के चिंतामणि हॉस्पिटल में मरीज की जांच की मांग को लेकर कुछ परिजनों ने अस्पताल में घुसकर डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया।
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जानकारी के अनुसार, हड़ताल के कारण अस्पताल में केवल आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं ही उपलब्ध होने की जानकारी बार-बार देने के बावजूद सबंधित लोगों ने अस्पताल कर्मचारियों से विवाद किया और हंगामा खड़ा कर दिया, स्थिति को शांत कराने के लिए डॉ. निलेश येलनारे ने बीच-बचाव करते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई, मारपीट करने की कोशिश की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रण में लिया, जिससे किसी बड़ी अप्रिय घटना को टाल दिया गया।
