यवतमाल का ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अध्ययन कक्ष’ बदहाल, छात्रों ने प्रशासन पर उठाए सवाल
Study Room Apathy: यवतमाल में प्रशासनिक अनदेखी के कारण डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अध्ययन कक्ष बदहाल है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच छात्र खुद जिम्मेदारी संभालने को मजबूर हैं।
- Written By: केतकी मोडक
‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अध्ययन कक्ष’ बदहाल (सोर्स - नवभारत)
Government Study Center Neglected यवतमाल में छात्रों की शैक्षणिक प्रगति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यवतमाल शहर में स्थापित ‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम अध्ययन कक्ष आज प्रशासनिक लापरवाही के कारण बदहाली का शिकार हो चुका है।
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बनाए गए इ स महत्वाकांक्षी प्रकल्प की वर्तमान दयनीय स्थिति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व विधायक मदन येरावार की संकल्पना से वर्ष 2020-21 में शुरू किए गए इस अध्ययन कक्ष का मुख्य उद्देश्य एमपीएससी, यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्थानीय छात्रों को सभी आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराना था।
निधि के खर्च को लेकर उठ रहे सवालिया निशान
लगभग 120 विद्यार्थियों की बैठक क्षमता वाले इस अध्ययन केंद्र के सुचारू संचालन के लिए शासन की ओर से हर वर्ष विशेष निधि भी उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों का सीधा आरोप है कि यह सरकारी निधि वास्तव में छात्रों की सुविधाओं पर खर्च हो रही है या कहीं और, यह सवाल अब गंभीर रूप से उठने लगा है। इस अध्ययन कक्ष का संपूर्ण प्रबंधन जिला सेतु समिति के अधीन है और जिलाधिकारी इसके पदेन अध्यक्ष हैं।
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इसके बावजूद, पिछले तीन महीनों से यहां नियुक्त लाइब्रेरियन लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि उनकी अनुपस्थिति में प्रशासन द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई। इसके चलते अब अध्ययन कक्ष को रोजाना समय पर खोलने, बंद करने और उसकी पूरी देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों पर आ गई है।
छत हुई क्षतिग्रस्त और वाई-फाई सेवा भी ठप
अध्ययन कक्ष के सौंदर्गीकरण के लिए परिसर में बनाए गए गार्डन की भी वर्षों से भारी उपेक्षा की जा रही है। मुख्य भवन के अंदर लगी पीओपी की छत कई जगहों से टूटकर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और वहां कबूतरों ने अपने घोंसले बना लिए हैं। इसके कारण लगातार होने वाली गंदगी और शोर छात्रों के अध्ययन में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन तैयारी करने वाले छात्रों के लिए इंटरनेट सुविधा बेहद आवश्यक है, लेकिन यहां पिछले कई महीनों से वाई-फाई सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है। इसके कारण विद्यार्थी ऑनलाइन क्लासेस, डिजिटल अध्ययन सामग्री और अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक गतिविधियों से वंचित हो रहे हैं। इसके साथ ही, वर्ष 2020-21 में खरीदी गई पुरानी पुस्तकों से ही छात्रों को मजबूरी में पढ़ाई करनी पड़ रही है।
विद्यार्थियों ने प्रशासन से नई पुस्तकें और अद्यतन नोट्स उपलब्ध कराने की भी मांग की है। छात्रों का कहना है कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बनाई गई इस अध्ययन कक्ष का मूल उद्देश्य ही अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है।
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विद्यार्थियों ने जिलाधिकारी से की तुरंत समाधान की मांग
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर परेशान विद्यार्थियों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लेकर समाधान किया जाए। उन्होंने स्थायी रूप से दो शिफ्ट में दो अलग-अलग लाइब्रेरियन नियुक्त करने, वाई-फाई सेवा तत्काल चालू करने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने तथा परिसर में पसरी गंदगी और सूअरों की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने की मांग की है। यवतमाल शहर के इस प्रमुख अध्ययन केंद्र की यह स्थिति छात्रों के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुकी है।
विद्यार्थियों ने यह अपेक्षा व्यक्त की है कि जिलाधिकारी विकास मीना इस मामले में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब कर अध्ययन कक्ष की स्थिति में जल्द से जल्द ठोस सुधार सुनिश्चित करेंगे।
