उम्मीदवारों ने प्रचार में झोंकी पूरी ताकत, मतदाता भी एक्शन में, उमरखेड़ नगर परिषद का महासंग्राम
Umarkhed Election 2025:उमरखेड़ नगर परिषद चुनाव में 132 उम्मीदवार मैदान में है। भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना सहित कई दलों की कड़ी टक्कर। मतदाता बदलाव के मूड में है।
- Written By: आंचल लोखंडे
उम्मीदवारों ने प्रचार में झोंकी पूरी ताकतॉ (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Umarkhed Municipal Council Election: उमरखेड़ नगर परिषद चुनाव के लिए अब केवल दो दिन शेष हैं। शहर के 13 प्रभागों से 26 नगरसेवक पदों के लिए 132 प्रत्याशी मैदान में हैं। वहीं नगराध्यक्ष पद के लिए 5 उम्मीदवारों ने जोरदार चुनावी मुकाबले की तैयारी कर ली है। चुनाव अपने अंतिम चरण में है और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ताकत झोंक रहे हैं। मतदाता भी सही प्रतिनिधि चुनने के लिए पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं।
इस चुनाव में भाजपा ने राष्ट्रवादी (अजीत), सत्यशोधक शेतकरी संघ तथा रिपाई (आठवले) के साथ गठबंधन कर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। दूसरी ओर, शिवसेना (शिंदे गुट) ने भाजपा पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नगराध्यक्ष सहित 25 नगरसेवक पदों पर उम्मीदवार उतारे हैं और एक मजबूत प्रचार अभियान चला रही है।
मतदाता बदलाव के मूड में
कांग्रेस, शिवसेना (ठाकरे) और विदर्भ-मराठवाड़ा विकास आघाड़ी द्वारा गठित उमरखेड़ जनशक्ति पैनल ने भी अपना कैंपेन तेज कर दिया है। राष्ट्रवादी (शरद) तथा AIMIM भी मजबूत दावेदारी के साथ मैदान में उतरी हैं। वहीं कई असंतुष्ट उम्मीदवार पार्टियों से नाराज़ होकर निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे मुकाबला और रोचक बन गया है। शहर में जातीय और सामाजिक समीकरण भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाते दिख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहर के मतदाता बदलाव के मूड में हैं।
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भाजपा को घेरने की रणनीति पर फोकस
राजनीतिक तौर पर मजबूत मानी जाने वाली भाजपा को टक्कर देने के लिए विपक्षी दल पूरी ताकत से जुटे हुए हैं। कांग्रेस और शिवसेना (ठाकरे) ने अपनी परंपरागत चुनाव नीति में बदलाव करते हुए संयुक्त रूप से उमरखेड़ जनशक्ति पैनल को समर्थन दिया है। राकापा (शरद), शिंदे शिवसेना और AIMIM भी किसी भी स्थिति में कमतर नहीं आंकी जा सकतीं।
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सत्ता पर कब्जा पाने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति का इस्तेमाल करते हुए सभी दलों ने लड़ाई को बेहद दिलचस्प और कड़ी टक्कर वाला बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। निर्दलीयों की उपस्थिति चुनाव परिणामों को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।
