मोरवाड़ी के खेतों में बाघ की दहशत, किसानों में डर का माहौल, जंगली सुअर का शिकार

Tiger Attack: बुधवार को एक बाघ ने एक जंगली सुअर का शिकार किया। इससे मोरवाड़ी क्षेत्र के किसान बेहद डरे हुए हैं। वन विभाग को तुरंत बाघ को पकड़ना चाहिए ऐसी मांग की जा रही है।
मोरवाड़ी के खेतों में बाघ की दहशत
मोरवाड़ी के खेतों में बाघ की दहशत (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Yavatmal News: महागांव (सं) महागांव तहसील के कालीदौलत खान वन परिक्षेत्र क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत मोरवाड़ी क्षेत्र के किसानों और खेतिहर मजदूरों में इन दिनों बाघ की दहशत बनी हुई है। हाल ही में पता चला है कि बुधवार को एक c ने एक जंगली सुअर का शिकार किया। इससे मोरवाड़ी क्षेत्र के किसान बेहद डरे हुए हैं। वन विभाग को तुरंत बाघ को पकड़ना चाहिए। इसके लिए 21 अगस्त को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया के माध्यम से वन परिक्षेत्र क्षेत्रीय अधिकारी को एक निवेदन दिया गया।

किसानों ने पाया कि बुधवार, 20 अगस्त को काली (दौलतखान) क्षेत्र के मोरवाड़ी खेत में सुनील मोहन पवार के खेत में एक बाघ ने जंगली सुअर पर हमला किया था। इससे किसानों और खेतिहर मजदूरों में खेत में काम करने जाने को लेकर भय का माहौल बन गया है। बाघ ने इस क्षेत्र में आतंक मचा रखा है। इसी के चलते वन विभाग ने उस जगह का निरीक्षण किया जहां बाघ ने जंगली सूअर का शिकार किया था, लेकिन इससे किसान संतुष्ट नहीं हुए। बाघ द्वारा जंगली सूअरों पर हमला करने के बाद, इस क्षेत्र के किसानों ने खेतों में जाना बंद कर दिया है।

कोई किसान जंगली जानवर के हमले में जान गंवाने का संभावना

इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता कि कभी कोई किसान जंगली जानवर के हमले में अपनी जान गंवा बैठे। इसी के चलते 21 अगस्त को क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय, काली दौलत में एक बयान दिया गया। इस बयान पर थावरा राठौड़, इंदल जाधव, अभय मोरे, शरद काले, बाबूलाल राठौड़, कोंडाबा पवार, नीलेश पवार, सुनील पवार, हरी जाधव, विकास राठौड़, देवानंद अंभोरे, सुभाष पवार, उकंडा राठौड़, उज्ज्वल रणवीर आदि किसानों के हस्ताक्षर हैं।

जंगली जानवरों के कारण हो रहा नुकसान

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सोशल मीडिया जिलाध्यक्ष हंसराज मोरे ने बताया कि अगर बाघ हमला करके किसी की जान ले लेता है, तो इस गंभीर मामले के लिए कौन ज़िम्मेदार है? इस कारण वन विभाग को अपने स्तर पर बाघ के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। क्षेत्र में किसानों के खेतों पर जंगली जानवरों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, कृषि को भारी नुकसान हो रहा है। किसान पहले से ही प्राकृतिक आपदा की स्थिति में थे। अभी वे इस संकट से उबर भी नहीं पाए हैं कि बाघ की दहशत बढ गई है। इसीलिए बाघ का बंदोबस्त करने की मांग की गई है। अन्यथा आंदोलन करने की चेतावनी दी गई।

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