मारेगांव SBI ब्रांच (सौजन्य-नवभारत)
State Bank of India Negligence: आदिवासी बहुल क्षेत्र के रूप में पहचानी जाने वाली मारेगांव तहसील, जिसमें 109 गांव शामिल हैं, वहां वर्ष 2007 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा स्थापित की गई थी। शुरुआत में बड़ी संख्या में लोगों ने बैंक में खाते खोले, लेकिन वर्षों बाद भी सुविधाओं में कोई खास वृद्धि नहीं की गई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि 65 हजार से अधिक ग्राहकों वाले इस बैंक में केवल एक ही कैश काउंटर संचालित है।
इसी एक काउंटर पर महिला और पुरुष ग्राहकों को घंटों लाइन में खड़े रहकर लेन-देन करना पड़ता है, जिससे ग्राहकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। तहसील में अधिकांश लोग किसान हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय खेती है। इसके अलावा छात्र-छात्राओं और विभिन्न सरकारी चालानों का काम भी इसी बैंक के माध्यम से होता है।
अन्य बैंकों की कमी के कारण ग्राहकों को मजबूरी में इसी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। ग्राहकों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें कई घंटे इंतजार करना पड़ता है, जिससे समय और श्रम दोनों की हानि हो रही है।
मारेगांव की यह शाखा पिछले कई वर्षों से किराए की इमारत में ही संचालित हो रही है। लगातार बढ़ती ग्राहक संख्या के बावजूद भवन और सुविधाओं का विस्तार नहीं किया गया है, जिससे बैंक में जगह की कमी महसूस की जा रही है।
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मारेगांव तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्राहकों के लिए बैंक में पीने के पानी की उचित व्यवस्था भी नहीं है। इससे ग्राहकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और बैंक प्रशासन के प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मारेगांव के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक तुषार क्षीरसागर ने बताया कि बैंक में स्टाफ की संख्या पर्याप्त है। फिलहाल 20 लीटर की दो पानी की कैन उपलब्ध कराई गई हैं। आने वाले समय में वाटर फिल्टर की व्यवस्था की जाएगी।