गोसीखुर्द विस्थापितों से मिलीं मेधा पाटकर, पुनर्वास और मुआवजे के मुद्दे पर फिर उठी आवाज
Medha Patkar News: नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने भंडारा जिले में गोसीखुर्द परियोजना से प्रभावित और विस्थापित गांवों का दौरा कर पुनर्वास, मुआवजा से जुड़ी समस्याओं का जायजा लिया।
Medha Patkar (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Gosikhurd Project News: नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख नेता मेधा पाटकर तथा गोसीखुर्द परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के संस्थापक संयोजक चंद्रशेखर भिवगडे ने गोसेखुर्द परियोजना के विशाल जलाशय में डूबे प्रभावित गांवों का दौरा कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वसित और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं, विस्थापन के बाद की परिस्थितियां और अब तक झेल रही कठिनाइयों की जानकारी ली। एक पुरस्कार समारोह और व्याख्यान कार्यक्रम के सिलसिले में भंडारा पहुंचीं मेधा पाटकर के लिए इस विशेष दौरे का आयोजन किया गया था।
जलाशय में डूबे गांवों का निरीक्षण गोसीखुर्द परियोजना के कारण अनेक गांव जलाशय में समा गए और सैकड़ों परिवारों का पुनर्वास किया गया। हालांकि वर्षों बीत जाने के बाद भी परियोजना प्रभावितों की कई मूलभूत समस्याएं अब तक हल नहीं हो सकी हैं। इसी पृष्ठभूमि में मेधा पाटकर ने जलाशय क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित गांवों की स्थिति देखी। डूबे हुए गांवों और विस्थापितों की बदहाल परिस्थितियों को देखकर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
मेधा पाटकर ने गोसीखुर्द परियोजना प्रभावित गांवों का किया दौरा
उन्होंने प्रभावित लोगों से जमीन के उचित मुआवजे, पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी और रोजगार जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरे में प्रा. नरेश आंबीलकर, आरती दलाल, सामाजिक कार्यकर्ता अमृत बनसोड, सरपंच कुंभलकर तथा पूर्व पुलिस पाटिल बंडू वंजारी सहित गोसीखुर्द परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के कई कार्यकर्ता शामिल थे।
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अधिकारों की लड़ाई तेज करने पर चर्चा
गोसीखुर्द बांध प्रभावितों के अधिकारों को लेकर संघर्ष समिति लंबे समय से आंदोलन कर रही है। मेधा पाटकर की इस यात्रा से स्थानीय आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर के जनआंदोलनों का समर्थन मिलने की संभावना बढ़ गई है। दौरे के दौरान प्रशासन की कथित उदासीनता के कारण प्रभावित लोगों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आगे संगठित संघर्ष तेज करने को लेकर भी चर्चा की गई।
