solar panel capacity rule (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal News: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूर्योदय मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों पर सोलर पैनल लगाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता उपभोक्ता की मांग के आधार पर नहीं, बल्कि पिछले 12 महीनों की बिजली खपत के आधार पर तय की जाएगी।
इस नए नियम के लागू होते ही उपभोक्ताओं, सोलर विक्रेताओं और उद्योग जगत में हलचल मच गई है। मिली जानकारी के अनुसार बिजली वितरण कंपनी ने हाल ही में यह नियम लागू किया है। इसके तहत किसी भी घर या प्रतिष्ठान में सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता तय करते समय पिछले एक वर्ष में उपयोग की गई बिजली का औसत निकाला जाएगा और उसी के आधार पर सोलर सिस्टम की क्षमता मंजूर की जाएगी।
पहले उपभोक्ता अपनी जरूरत या भविष्य के अनुमानित उपयोग के अनुसार सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता तय कर सकते थे। विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य सोलर ऊर्जा के नाम पर अतिरिक्त बिजली उत्पादन को नियंत्रित करना है।
कई स्थानों से यह शिकायत सामने आई थी कि कुछ लोग जरूरत से अधिक क्षमता वाले सोलर प्रोजेक्ट लगाकर ज्यादा बिजली उत्पादन कर रहे थे और उसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कर रहे थे। ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह नया नियम लागू किया गया है।
नए नियम के अनुसार यदि कोई उपभोक्ता सोलर प्रोजेक्ट से जरूरत से अधिक बिजली पैदा करता है और उसका उपयोग निर्धारित नियमों के विपरीत करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। बिजली उत्पादन और उपयोग में बड़ा अंतर पाए जाने पर जांच भी की जा सकती है। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी वास्तविक बिजली खपत के अनुसार ही सोलर प्रोजेक्ट स्थापित करें।
जानकारी के अनुसार 2 किलोवाट क्षमता का सोलर प्रोजेक्ट लगाने में लगभग 1.20 लाख से 1.30 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जाता है, जिससे उपभोक्ताओं का खर्च कम हो जाता है। वहीं 3 किलोवाट क्षमता वाले सोलर प्रोजेक्ट पर लगभग 1.70 लाख से 2 लाख रुपये तक खर्च आता है और इसमें करीब 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
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यदि भविष्य में किसी उपभोक्ता की बिजली खपत बढ़ती है, तो उसे सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता बढ़ाने के लिए अलग से आवेदन करना होगा। बिजली वितरण कंपनी द्वारा जांच और मंजूरी मिलने के बाद ही क्षमता बढ़ाई जा सकेगी।
इस नए नियम को लेकर कई उपभोक्ताओं ने नाराजगी भी जताई है। उनका कहना है कि पहले वे भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अधिक क्षमता का सोलर सिस्टम लगा सकते थे, लेकिन अब यह विकल्प सीमित हो गया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह नियम सोलर ऊर्जा के सही उपयोग और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।