यवतमाल में नगराध्यक्ष के घर के सामने घंटों में बनी सड़क, नागरिकों ने उठाए पक्षपात के सवाल
Urban Infrastructure Issues: यवतमाल के राणाप्रताप नगर में सड़कें महीनों से खुदी पड़ी हैं, लेकिन नगराध्यक्ष के घर के सामने घंटों में सड़क बन गई। इस VIP संस्कृति पर नागरिकों में भारी आक्रोश है।
- Written By: केतकी मोडक
नगराध्यक्ष के घर के सामने कि सड़क (सोर्स - फोटो नवभारत)
Yavatmal Road Construction Controversy: महाराष्ट्र के यवतमाल शहर से नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के राणाप्रताप नगर क्षेत्र में प्रशासन की दोहरी नीतियों और VIP ट्रीटमेंट को लेकर स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
शहर का एक बड़ा हिस्सा जहां बुनियादी सुविधाओं और बदहाल सड़कों के कारण महीनों से नरकीय जीवन जीने को मजबूर है, वहीं दूसरी ओर यवतमाल की नगराध्यक्ष प्रियदर्शनी उईके के निजी निवास स्थान के ठीक सामने की खराब सड़क का प्रशासन ने महज कुछ ही घंटों के भीतर कंक्रीटीकरण कर दिया।
इस वाकये के बाद शहर में यह चर्चा जोरों पर है कि नगरपालिका के नियम-कायदे क्या सिर्फ आम जनता के लिए हैं और सत्ताधारियों के लिए प्रशासनिक मशीनरी अलग मापदंड अपनाती है?
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नगराध्यक्ष के लिए युद्धस्तर पर एक्टिव हुई मशीनरी
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, नगराध्यक्ष प्रियदर्शनी उईके के घर के सामने जैसे ही सड़क की मामूली समस्या सामने आई, वैसे ही यवतमाल नगरपालिका की पूरी प्रशासनिक मशीनरी और मजदूर बिना वक्त गंवाए युद्धस्तर पर सक्रिय हो गए। आनन-फानन में भारी भरकम मशीनें बुलाई गईं और रिकॉर्ड बेहद कम समय के भीतर कंक्रीट सड़क का निर्माण कार्य पूरा भी कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि इसी राणाप्रताप नगर क्षेत्र के मुख्य रास्तों और अंदरूनी गलियों में पिछले एक महीने से ड्रेनेज लाइन के काम के कारण सड़कें पूरी तरह से खोदकर छोड़ दी गई हैं। सड़कों की इस बदहाली की वजह से उड़ने वाली धूल, जमा कीचड़ और रोजाना होने वाली भारी यातायात अव्यवस्था से स्थानीय निवासी, स्कूली बच्चे और राहगीर बुरी तरह त्रस्त हैं।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार नगरपालिका प्रशासन के चक्कर काटे और लिखित शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अधिकारियों ने उनकी जायज मांगों को हमेशा ठंडे बस्ते में डाल दिया।
शहर में ‘अमृत’ और सीवर के काम अधर में
पूरे यवतमाल शहर की बात करें तो स्थिति और भी बदतर है। शहर के अनगिनत रिहायशी और व्यापारिक इलाकों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत योजना’, भूमिगत सीवर लाइन, विभिन्न निजी कंपनियों की केबल और पानी की पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को बेरहमी से खोदा गया है। महीनों बीत जाने के बाद भी इन सड़कों की मरम्मत या पैचवर्क का काम नहीं किया गया है, जिससे पूरा शहर धूल के गुबार में तब्दील हो चुका है।
नागरिकों का कहना है कि आम जनता को हो रही इस भारी असुविधा पर न तो कोई अधिकारी ध्यान देने को तैयार है और न ही सत्ता पक्ष का कोई जनप्रतिनिधि। लेकिन जैसे ही बात नगराध्यक्ष के खुद के परिसर की आई, तो बजट और टेंडर की तमाम औपचारिकताओं को दरकिनार कर कुछ ही घंटों में सड़क चमका दी गई।
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“क्या नगरपालिका सिर्फ सत्ताधारियों की जागीर है?” जनता के तीखे सवाल
नगराध्यक्ष के घर के सामने हुए इस एक्सप्रेस रोड निर्माण को देखकर स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यह वाकया साफ तौर पर प्रशासनिक तंत्र में हावी हो चुकी “वीआईपी संस्कृति” की जीती-जागती और शर्मनाक झलक है। आक्रोशित नागरिकों ने अब सीधे नगरपालिका प्रशासन और सत्ताधारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं।
लोगों का पूछना है कि क्या यवतमाल नगरपालिका सचमुच टैक्स भरने वाली आम जनता की संस्था है या यह केवल रसूखदारों और सत्ता में बैठे लोगों की सुख-सुविधाओं के लिए काम करने वाली कोई प्राइवेट एजेंसी बनकर रह गई है? बहरहाल, इस भेदभावपूर्ण घटनाक्रम ने शहर के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है और अब जनता आने वाले चुनावों में इसका जवाब देने की बात कह रही है।
