‘प्राथमिक उपचार’ के प्रति समाज लापरवाह, 25 साल बाद भी ST बसों से फर्स्ट एड बॉक्स गायब
First Aid Box: यवतमाल में प्राथमिक उपचार को लेकर किसी भी प्रकार की जागरूकता अब नजर नहीं आ रही। 25 साल बाद भी प्राथमिक उपचार को लेकर जानकारी उपलब्ध नहीं है।
- Written By: प्रिया जैस
प्राथमिक उपचार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Yavatmal News: दुर्घटना होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना हमेशा संभव नहीं था। ऐसे समय में तत्काल उपचार को ‘प्राथमिक उपचार’ कहा जाता है। यही वह प्राथमिक उपचार है जो कई लोगों की जान बचाता है। इस संबंध में जन जागरूकता पैदा करने के लिए ‘विश्व प्राथमिक उपचार दिवस’ की परंपरा शुरू की गई थी। लेकिन इस परंपरा के 25 साल बाद भी समाज में प्राथमिक उपचार के प्रति उदासीनता बनी हुई है।
आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को तुरंत प्राथमिक उपचार दे सकता है। इसके लिए जागरूकता ज़रूरी है। वर्ष 2000 से हर साल ‘विश्व प्राथमिक उपचार दिवस’ मनाया जाता है। यह दिवस सितंबर के दूसरे शनिवार को मनाया जाता है। चोट लगने पर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, मरीज की मदद कैसे करनी चाहिए, प्राथमिक उपचार के लिए कौन सी दवाइयां और सामग्री रखनी चाहिए, इस बारे में जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जाते हैं।
लेकिन 25 साल बाद भी लोग ‘प्राथमिक उपचार दिवस’ क्या है, यह नहीं जानते। प्राथमिक उपचार का महत्व समझ में नहीं आता। इस बात पर व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है कि दुर्घटना के ‘गोल्डन ऑवर’ यानी दुर्घटना के आधे घंटे के भीतर पीड़ित तक पहुँचना कितना ज़रूरी है।
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हर स्कूल में जागरूकता
सैकड़ों छात्र रोज़ाना सात से आठ घंटे स्कूलों में बिताते हैं। इस दौरान खेलते समय उन्हें कई बार चोट लग जाती है। लेकिन ज़िला परिषद के ज़्यादातर स्कूलों में आज भी ‘प्राथमिक उपचार बॉक्स’ नहीं है। निजी स्कूलों में तो यह सावधानी बरती जा रही है, लेकिन गाँवों के सरकारी स्कूलों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों को इस संबंध में प्रशासन से जवाब माँगने की ज़रूरत है।
परिवहन निगम की लापरवाही
मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, राज्य परिवहन निगम की राज्य परिवहन बसों में ‘प्राथमिक उपचार बॉक्स’ होना अनिवार्य है। शुरुआत में ये बॉक्स बसों में दिखते थे, लेकिन अब ये गायब हो गए हैं। कुछ बसों में बॉक्स हैं, लेकिन वे नीचे हैं। यवतमाल ज़िले में हर दिन लगभग 358 बसें सड़कों पर चलती हैं, जिनमें सवा लाख से ज़्यादा यात्री यात्रा करते हैं। उनके स्वास्थ्य की दृष्टि से, प्रत्येक बस में एक अद्यतन प्राथमिक चिकित्सा किट होनी चाहिए।
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प्राथमिक चिकित्सा किट में क्या होना चाहिए?
स्टरलाइज़्ड (स्टरलाइज़्ड) गॉज़ ड्रेसिंग, स्टिकिंग प्लास्टर रोल, चिपकने वाली ड्रेसिंग और पट्टियां, सूती क्रेप पट्टियां, रोलर पट्टियां, त्रिकोणीय पट्टियां, डिटॉल, सेवलॉन, पैरासिटामोल या गोलियां, ग्लिसरीन, डिस्पोजेबल दस्ताने, फेस मास्क, सर्जिकल कैंची, हाथ धोने के लिए एंटीसेप्टिक साबुन आदि।
