महागांव: सवना ग्रामीण अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित, एक डॉक्टर की गैरहाजिरी बनी समस्या
Mahagaon Health Services: महागांव के सवना ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और रिक्त पदों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Rural Hospital (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Sawana Rural Hospital: महागांव तहसील के ग्राम सवना स्थित ग्रामीण अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अर्जित अवकाश पर गए एक चिकित्सा अधिकारी के अब तक ड्यूटी पर वापस नहीं लौटने से अस्पताल की व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। उन्होंने जिला स्वास्थ्य विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु करने की मांग की है।
सवना ग्रामीण अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों के कुल 3 पद स्वीकृत हैं और सभी पद भरे हुए हैं। लेकिन वर्तमान में केवल 1 अधिकारी ही नियमित रूप से उपलब्ध हैं। शेष 2 पदों में से एक अधिकारी अर्जित अवकाश पर हैं, जबकि दूसरे अधिकारी का तबादला हो चुका है।
सवना अस्पताल में स्वास्थ्य संकट
इसके कारण अस्पताल में मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जानकारी के अनुसार, डॉ। मच्छिंद्र सुरमवाड 4 जून 2024 से 3 जुलाई 2025 तक अर्जित अवकाश पर गए थे। अवकाश समाप्त हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उन्होंने अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। अस्पताल प्रशासन द्वारा उन्हें 8 बार पत्र भेजे जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं मिला है।
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मरीजों को हो रही भारी परेशानी
चिकित्सा अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे अस्पताल के अन्य कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है। वहीं, केवल 8 दिनों की प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों के कारण मरीजों और डॉक्टरों के बीच समन्वय की कमी बनी रहती है, जिससे कई बार विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है।
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स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की कगार पर
स्थायी चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण नई नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। करीब 2 वर्षों से अवकाश पर रहने के बावजूद संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से वरिष्ठ स्तर पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। अब सभी की निगाहें जिला स्वास्थ्य प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है।
