जनता डरी, अधिकारी बंद कमरों की बैठकों में व्यस्त! नागपुर की अव्यवस्था पर पूर्व पार्षदों की चुप्पी पर उठे सवाल
Nagpur Waterlogging: नागपुर में 70 मिमी से कम बारिश ने ही शहर की तैयारियों की पोल खोल दी। कई इलाके जलमग्न हुए, घरों में पानी घुसा और एक व्यक्ति की मौत के बाद इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, जलभराव,(सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur Rain Exposes Infrastructure: नागपुर जिले में बुधवार रात हुई 70 मिमी से कम बारिश ने ही नागपुर शहर की पोल खोल दी। शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए, सड़कों पर पानी भर गया, घरों में बाढ़ आ गई और लोग फंस गए। सबसे दुखद बात यह है कि इस बारिश ने एक व्यक्ति की जान भी ले ली। शहरवासी अब उस स्थिति से डर रहे हैं जब शहर में सितंबर 2023 की तरह 100 मिमी से अधिक की मूसलाधार बारिश होगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सिटी में किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य का इस बार ‘रेन टेस्ट’ होने वाला है। यह भी देखना होगा कि जनता को राहत मिलेगी यह फिर प्रशासन लाचार दिखेगा। तमाम सवाल जनता के मन में हैं। लोग डरे हुए हैं और अधिकारी अब भी बंद कमरों में मीटिंग में व्यस्त हैं। नगरसेवकों की ‘अचार संहिता छुट्टी’ भी खत्म हो गई है परंतु उनकी आवाज भी ‘अव्यवस्था’ को लेकर बुलंद नहीं हो रही है।
‘जुगाड़’ पर टिकी व्यवस्था
नागपुर महानगरपालिका (मनपा) ने खुद स्वीकार किया है कि शहर के करीब 70-80 बाढ़ प्रभावित क्षेत्र (हॉटस्पॉट) हर साल परेशानी का सबब बनते हैं। हैरानी की बात यह है कि ड्रेनेज के काम पर करोड़ों रुपये खर्च करने और मनपा में 4 बार भाजपा का कार्यकाल रहने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।
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हर साल मानसून से पहले मनपा का अग्निशमन और आपातकालीन विभाग केवल ‘आपातकालीन प्रबंधन’ की तैयारी करता है। इसमें बाढ़ संभावित स्थानों की पहचान करना, जोनल कार्यालयों को अलर्ट करना, बचाव दल तैनात करना और डी-वाटरिंग पंप तैयार रखना शामिल है लेकिन यह केवल एक अस्थायी उपाय बनकर रह गया है।
इन इलाकों में हर साल होता है ‘जल तांडव’
- विभाग ने इस बार भी भी शहर र में में 77 निचले इलाकों और 59 बेसमेट को बाढ़ संभावित के रूप में विहिनत किया है। यह सूची हर साल एक जैसी ही रहती है, जो नागरिक प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।
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- कांचीपुरा, झिंगाबाई टाकली, पांढराबोडी, मोर भवन, मानकापुर रिंग रोड, बजरिया, लोहा पुल आरयूबी, मोमिनपुरा, रामेश्वरी, पिपला रोड, हुडकेश्वर रोड, भारतवाड़ा और पीली नदी बेल्ट जैसे इलाके हर मानसून में डूबते हैं।
